अधिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की विशेष कृपा: तिथि, नक्षत्र और शुभ मुहूर्त की पूरी जानकारी
परिचय
अधिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र मानी जाती है, खासकर अधिक मास या मलमास के दौरान आने वाली यह पूर्णिमा। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा का अनुभव होता है। संवत 2083 के अनुसार, आज ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा तिथि दोपहर 2:14 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा प्रारंभ हो जाएगी। यह रविवार को पड़ने वाली पूर्णिमा पूजा, दान और आराधना के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।
JSRnews.com | Religious | 31 May 2026
मुख्य बातें
- अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह अत्यंत पवित्र होता है।
- अधिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की कृपा विशेष रूप से बरसती है।
- आज का अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51 से 12:47 तक शुभ कार्यों के लिए आदर्श है।
- राहुकाल और अन्य अशुभ कालों का ध्यान रखते हुए कार्य करना चाहिए।
- अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव सौहार्द और मित्रता बढ़ाता है।
पृष्ठभूमि
हिंदू कैलेंडर में अधिक मास या मलमास का विशेष धार्मिक स्थान है। यह मास हर तीसरे या चार वर्ष में आता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। अधिक मास की पूर्णिमा को अधिक पूर्णिमा कहते हैं, जो साधारण पूर्णिमा से अधिक शुभ मानी जाती है। यह समय पूजा, दान और आध्यात्मिक क्रियाओं के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
अधिक पूर्णिमा को भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्ति का दिन माना जाता है। इस दिन व्रत और पूजा करने से धार्मिक अनुग्रह मिलता है और जीवन में सुख-शांति बढ़ती है।
ताजा अपडेट
आज का शुभ योग शिव योग से प्रारंभ होकर बाद में सिद्ध योग में परिवर्तित होगा। बव करण दोपहर 2:14 बजे तक रहेगा, इसके बाद बालव और कौलव करण क्षण शुरू होंगे। सूर्य का उदय सुबह 5:24 और अस्त शाम 7:14 बजे होगा। चंद्रमा शाम 7:36 बजे तक देखेगा, चंद्रास्त नहीं होगा।
अधिक पूर्णिमा पर आधिकारिक अभिव्यक्तियाँ
धार्मिक पंडित और ज्योतिषियों ने बताया है कि अधिक पूर्णिमा पर विशेष पूजा और दान करने से भगवान विष्णु की कृपा अत्यधिक मिलती है। अभिजीत मुहूर्त का समय विशेष रूप से शुभ कार्यों हेतु उपयुक्त माना गया है। उन्होंने आम लोगों को राहुकाल में कार्य आरंभ करने से बचने की सलाह भी दी है।
जनता पर प्रभाव
अधिक पूर्णिमा पर भगवान विष्णु की कृपा का आशीर्वाद भक्तों को आध्यात्मिक दृढ़ता और मानसिक शांति देता है। यह दिन धार्मिक आयोजन, मंदिरों में भक्तों की बढ़ती भीड़ और धार्मिक गतिविधियों के लिए विशेष होता है।
आगे क्या होगा
अधिक पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष का प्रारंभ होगा, जो अगले महीने की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों का मार्गदर्शन करेगा। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे इस पूर्णिमा के शुभ अवसर को धार्मिक कर्तव्यों और दान-पूजा में लगाएं।
निष्कर्ष
अधिक पूर्णिमा हिंदू धार्मिक कैलेंडर का एक महत्वपूर्ण दिन है, जो भगवान विष्णु की विशेष कृपा के लिए प्रतिष्ठित है। शुभ मुहूर्त और नक्षत्रों के अनुसार इस दिन किए गए कार्य सफल होते हैं। इसलिए आज के दिन पूजा-अर्चना और दान देने का विशेष महत्व है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- अधिक पूर्णिमा क्या है?
अधिक मास की पूर्णिमा को अधिक पूर्णिमा कहा जाता है, यह सामान्य पूर्णिमा से अधिक धार्मिक महत्व रखती है। - अधिक पूर्णिमा कब होती है?
यह ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि पर पड़ती है जो संवत 2083 के अनुसार आज है। - क्या आज कोई शुभ मुहूर्त है?
हाँ, आज अभिजीत मुहूर्त 11:51 बजे से 12:47 बजे तक है जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम है। - राहुकाल का क्या समय है?
आज राहुकाल शाम 5:30 बजे से 7:14 बजे तक रहेगा, इस अवधि में नए कार्य शुरू न करें। - अधिक पूर्णिमा पर क्या करें?
पूजा, दान और भगवान विष्णु की आराधना करें जिससे विशेष फल प्राप्त होते हैं।
