ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा आज: शुभ व्रत-पूजन के समय और धार्मिक महत्व के बारे में जानिए
परिचय: आज ज्येष्ठ अधिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन व्रत-पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
JSRnews.com | Religious | 30 May 2026
प्रमुख बातें
- ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा आज है।
- सूर्य वृषभ राशि में, चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा।
- शिव योग का प्रभाव पूरे दिन रहेगा।
- अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51 से 12:46 बजे तक है।
- राहुकाल, गुलिकाल और यमगण्ड का समय निर्धारित है।
पृष्ठभूमि
ज्येष्ठ अधिक मास हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के अतिरिक्त मास में आता है। पूर्णिमा तिथि पर व्रत-पूजन करने का विशेष धार्मिक महत्व रहता है, जिससे मनोकामनाएं पूरी होती हैं और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का महत्व
इस दिन स्नान, दान और व्रत से पीड़ाओं का निवारण होता है। शिव योग का साथ होने के कारण यह समय शिवजी की उपासना के लिए भी उत्तम माना जाता है।
ताजा जानकारी
आज सूर्य शुभ वृषभ राशि में स्थित है और चंद्रमा तुला से वृश्चिक राशि में पहुंचा है। सुबह से शाम तक विशाखा तथा अनुराधा नक्षत्र क्रमशः प्रभावी हैं।
शुभ मुहूर्त और काल
अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:51 बजे से 12:46 बजे तक है, जो नए कार्यों हेतु सर्वोत्तम समय है। अमृत काल 31 मई की सुबह 4:33 से 6:21 बजे तक रहेगा, जब कोई भी पुण्यकार्य करना शुभ माना जाता है। सूर्योदय समय सुबह 5:24 और सूर्यास्त शाम 7:13 बजे है।
आधिकारिक बयान
पंडितों का मानना है कि आज का दिन व्रत, पूजा-पाठ और धर्म कर्म करने के लिए अत्यंत शुभ है। शिव योग के कारण ध्यान व साधना में अधिक फलदायक परिणाम मिलेंगे।
जनता पर प्रभाव
धार्मिक अनुयायी आज अपने घरों में या मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहें हैं। व्रत एवं दान से सामाजिक सदभाव और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
आगे क्या होगा?
31 मई को पूर्णिमा स्नान और दान का विशेष महत्व रहेगा। यह दिन भक्तिमय होगा और धार्मिक आयोजनों की भी संभावना बढ़ेगी।
निष्कर्ष
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ है। इस दिन किए जाने वाले व्रत-पूजन और दान से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और आध्यात्मिक लाभ होते हैं। सभी को इस दिन की महत्ता समझनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा कब है? - आज ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा तिथि है।
- व्रत कैसे करें? - उपवास रखकर पूजा और दान करना शुभ होता है।
- शिव योग का महत्व क्या है? - यह योग आध्यात्मिक उन्नति और शुभ संकल्पों के लिए अनुकूल होता है।
- अभिजीत मुहूर्त कब है? - दोपहर 11:51 से 12:46 बजे तक।
- अमृत काल कब है? - 31 मई की सुबह 4:33 बजे से 6:21 बजे तक।