संविधान हत्या दिवस: भाजपा जमशेदपुर महानगर ने आपातकाल को बताया लोकतंत्र का काला अध्याय
JSRnews.com | Politics | 27 Jun 2026
परिचय
झारखंड के जमशेदपुर में भाजपा महानगर इकाई ने 1975 के आपातकाल के विरोध में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया। इस अवसर पर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे विवादित दौर को याद करते हुए लोकतंत्र की रक्षा के महत्व पर गहरा प्रकाश डाला गया।
मुख्य आकर्षण
- जीवनावरण तुलसी भवन में संगोष्ठी एवं प्रदर्शनी का आयोजन।
- आपातकाल में जेल में पड़ी यातनाओं का स्मरण करते हुए लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान।
- मुख्य वक्ता और वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं का संबोधन।
- युवाओं के लिए आपातकाल की शिक्षाओं पर ज़ोर।
पृष्ठभूमि
भारतीय इतिहास में 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा घोषित आपातकाल को लोकतंत्र के लिए एक कालापन माना जाता है। इस अवधि में मूलभूत अधिकार सीमित किए गए, प्रेस सेंसरशिप लागू हुई और लाखों राजनीतिक नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल भेजा गया।
ताजा अपडेट
बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के मानस सभागार में भाजपा जमशेदपुर महानगर की ओर से संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण की तस्वीर पर पुष्प अर्पण और दीप प्रज्ज्वलन से हुई। साथ ही, आपातकाल आधारित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया।
आधिकारिक बयान
भाजपा महानगर अध्यक्ष संजीव सिन्हा ने कहा कि युवाओं को इस इतिहास से अवगत कराना नितांत आवश्यक है ताकि वे लोकतंत्र की रक्षा में आगे आ सकें। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने आपातकाल को लोकतंत्र का 'सबसे काला अध्याय' बताते हुए कहा कि उस दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ। सांसद विद्युत वरण महतो और प्रदेश प्रवक्ता अभय सिंह ने भी आपातकाल के दौरान लोकतंत्र का दबाव और जनता के उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त की।
जनता पर प्रभाव
कार्यक्रम में उपस्थित लोकतंत्र सेनानियों ब्रह्मदेव नारायण शर्मा, दिनेश मंडल, ललन सिंह और दयाशंकर पांडेय को अंगवस्त्र व पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम लोकतंत्र की महत्ता और आपातकाल के भयावह प्रभाव को याद दिलाने का प्रयास रहा। बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, पूर्व विधायक और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
आगे क्या?
भाजपा जमशेदपुर महानगर ने भविष्य में भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित कर लोकतंत्र के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया है। युवाओं को इतिहास से सीख लेकर भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा को मजबूत करने पर भलीभांति ध्यान दिया जाएगा।
निष्कर्ष
संविधान हत्या दिवस के माध्यम से आपातकाल के काले इतिहास को स्मरण किया गया और लोकतंत्र के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी गई। यह दिवस भारतीय लोकतंत्र की समस्याओं की भी चेतावनी के रूप में उभरा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- आपातकाल कब लगाया गया था? – 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा।
- संविधान हत्या दिवस क्या है? – यह दिन आपातकाल के दौरान लोकतंत्र के हनन को याद करने और लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानित करने के लिए मनाया जाता है।
- भाजपा ने इस दिन क्यों मनाया? – लोकतंत्र की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को इतिहास से अवगत कराने के लिए।
- आपातकाल के दौरान क्या हुआ था? – मौलिक अधिकारों का निरस्तीकरण, प्रेस सेंसरशिप, और विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी।
- लोकतंत्र सेनानियों को कैसे सम्मानित किया गया? – अंगवस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर।



