SC ST Creamy Layer मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया संसद को जिम्मेदारी, सुनवाई से किया इनकार
JSRnews.com | Politics | 16 Jun 2026
परिचय
सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST समुदाय के लिए इनकम टैक्स में क्रीमी लेयर लागू करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इंकार कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह विषय संसद और सरकार के विधायिका क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संसदीय समिति के समक्ष अपनी बात रखने की सलाह दी है।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने SC-ST क्रीमी लेयर मामले में सुनवाई से इंकार किया।
- अदालत ने कहा, कानून बनाने और संशोधन का अधिकार केवल संसद के पास है।
- याचिकाकर्ता ने आर्थिक रूप से समृद्ध लोगों को विशेष लाभ देने पर असमानता का हवाला दिया था।
- न्यायालय ने संसदीय समिति के समक्ष मुद्दा उठाने की सलाह दी।
पृष्ठभूमि
अनुसूचित जाति और जनजाति के अधिकारों व लाभों को लेकर वर्षों से चर्चा चल रही है। इनकम टैक्स नियमों में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू करने की मांग प्रमुखता से उठी है, ताकि आर्थिक रूप से सक्षम वर्ग के लोगों को आरक्षण और विशेष लाभों से बाहर रखा जा सके।
SC ST Creamy Layer मुद्दे की प्रासंगिकता
इस तरह के विवाद अक्सर सामाजिक न्याय एवं संविधान के समानता सिद्धांत के दृष्टिगत देखे जाते हैं। आर्थिक स्थिति को लाभ के आधार पर सीमित करने की मांग का मकसद है संसाधनों का अधिक न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना।
ताजा घटनाक्रम
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी थी कि कुछ आदिवासी समूह उच्च शिक्षा संस्थान चला कर करोड़ों रुपये कमा रहे हैं फिर भी वे आरक्षण जैसे लाभ पा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामलों का निर्णय न्यायपालिका नहीं बल्कि संसद के हाथ में है।
आधिकारिक बयान
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘यह नीतिगत मामला है, जिसमें सीधे न्यायालय हस्तक्षेप नहीं कर सकता। अगर कानून में बदलाव आवश्यक है तो वह संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से संभव है।’
जनता पर प्रभाव
यह फैसला SC-ST समुदाय के भीतर क्रीमी लेयर से जुड़े विवाद को संसद के समक्ष पुनः प्रतिबिंबित करेगा। समुदाय के आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग के लाभों को सीमित करने की मांग पर नई बहस शुरू हो सकती है।
आगे क्या होगा?
याचिकाकर्ता को संसदीय समिति के समक्ष अपनी बात रखने के निर्देश से यह स्पष्ट होता है कि अगली चरमसीमा विधायी स्तर होगी। संसद से संभावित संशोधन और नीति निर्धारण पर नजर बनी रहेगी।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने SC ST Creamy Layer मामले में स्पष्ट कर दिया है कि संवैधानिक और सामाजिक न्याय से जुड़े ऐसे विवाद कानूननिर्माण संस्था संसद की जिम्मेदारी हैं। न्यायपालिका ने अपनी सीमाएं स्थापित करते हुए नीति निर्धारण के लिए संसदीय प्रक्रिया को प्राथमिकता दी है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- SC-ST क्रीमी लेयर क्या है? - यह आर्थिक रूप से सक्षम SC-ST सदस्यों को आरक्षण से बाहर रखने का प्रावधान है।
- सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर क्यों सुनवाई नहीं की? - क्योंकि यह मामला संसद और सरकार के विधायी क्षेत्र में आता है।
- अगला कदम क्या होगा? - याचिकाकर्ता संसदीय समिति के सामने मुद्दा उठाएंगे।
- क्रीमी लेयर लागू करने से क्या फायदा होगा? - इससे आर्थिक रूप से मजबूत वर्ग को विशेष लाभों से बाहर रखा जा सकेगा।
- क्या संसद नया कानून बना सकती है? - हाँ, संसद के पास कानून बनाने का पूर्ण अधिकार है।



