पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के बढ़ते मामले: 12 दिनों में 1,731 मरीज और 6 मौतें
JSRnews.com | Local | 11 Jul 2026
परिचय
पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया संक्रमण ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले 12 दिनों में संक्रमण के 1,731 नए मामले सामने आए हैं, जिनमें छह मौतें भी हुई हैं। यह स्थिति इलाके के ग्रामीण इलाकों में गंभीर रूप ले रही है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने सक्रिय होकर इस बीमारी को रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं।
प्रमुख तथ्य
- 12 दिनों में 77,770 लोगों की मलेरिया जांच हुई।
- कुल 1,731 लोग मलेरिया संक्रमित पाए गए।
- प्लाज्मोडियम फैल्सीफेरम (PF) संक्रमण सबसे अधिक पाया गया।
- 6 लोगों की मौत हुई है।
- फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव जैसे बचाव अभियान तेज किए गए।
पृष्ठभूमि
मलेरिया एक जानलेवा बीमारी है जो मच्छरों के काटने से फैलती है। पूर्वी सिंहभूम के ग्रामीण क्षेत्रों में पानी के जमा होने और स्वच्छता की कमी के कारण परजीवी तेजी से फैल रहे हैं। विशेषकर PF वेरिएंट ब्रेन मलेरिया का कारण बनता है और इसके प्रकोप से स्वास्थ्य विभाग को सतर्क रहना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग की जाँच रिपोर्ट
स्वास्थ्य विभाग की 29 जून से 10 जुलाई 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार 77,770 लोगों की जांच में 1,731 केस पोजिटिव मिले हैं, जिसमें PF संक्रमण 78.5% से अधिक है। 10 जुलाई को ही 14,200 लोगों की जांच में 128 नए मरीज सामने आए, जिनमें से 93 PF से संक्रमित पाए गए।
हाल की जानकारी
जिला मलेरिया पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धाउड़िया ने बताया कि संक्रमण को रोकने के लिए विशेष कदम उठाए जा रहे हैं। फॉगिंग, डीडीटी, और आईआरएस के जरिए कीटनाशक छिड़काव नौ गांवों में किया गया है। साथ ही जनजागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, जिसमें लोगों को मच्छरों से बचाव के उपाय समझाए जा रहे हैं।
सरकारी बयान
डॉ. धाउड़िया ने कहा, "हम ग्रामीण इलाकों में पानी जमा नहीं होने देने, मच्छरदानी का नियमित प्रयोग करने और समय पर बुखार होने पर जांच कराने की अपील करते हैं। फौरी कार्रवाई के तहत हर संभव प्रयास किया जा रहा है ताकि इस महामारी को फैलने से रोका जा सके।"
जनता पर असर
मलेरिया के बढ़ते मामलों ने ग्रामीण जनजीवन को प्रभावित किया है। लोग भयभीत हैं और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ गई है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ी है और लोक स्वास्थ्य केन्द्र सतर्क हैं।
आगे की रणनीति क्या होगी?
आशा की जा रही है कि लगातार फॉगिंग, कीटनाशक छिड़काव और सार्वजनिक जागरूकता के माध्यम से मलेरिया संक्रमण को कम किया जा सकेगा। स्वास्थ्य विभाग जिले में निगरानी बढ़ाएगा और नए मरीजों की त्वरित पहचान व इलाज सुनिश्चित करेगा।
निष्कर्ष
पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन ने प्रभावी कदम उठाए हैं, लेकिन संक्रमण की तेजी देखते हुए सतर्कता आवश्यक बनी हुई है। जनता को भी स्वच्छता एवं बचाव के उपाय अपनाने होंगे ताकि यह बीमारी समाप्त हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- मलेरिया क्या है? मलेरिया एक संक्रामक बीमारी है जो मच्छर के काटने से फैलती है।
- पीएफ संक्रमण क्यों खतरनाक है? यह ब्रेन मलेरिया का कारण बनता है और गंभीर है।
- मलेरिया से बचाव के लिए क्या करें? मच्छरदानी का उपयोग, पानी जमने न देना, कीटनाशक का छिड़काव।
- क्या मलेरिया का इलाज संभव है? हां, जल्दी पहचान कर इलाज संभव है।
- सरकार इस स्थिति से कैसे निपट रही है? फॉगिंग, जांच अभियान और जागरूकता बढ़ाकर।



