पोटका में एंबुलेंस न मिलने पर मरीज को खटिया के सहारे 4 किमी ले गए ग्रामीण
JSRnews.com | Local | 26 Jul 2026
परिचय
पूर्वी सिंहभूम के डुमरिया प्रखंड के पोटका क्षेत्र में सड़क सुविधा का अभाव एक गंभीर समस्या बनकर सामने आया है। यहां के ग्रामीणों को पिछले दिनों एक गंभीर बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के दौरान एंबुलेंस की अनुपलब्धता का सामना करना पड़ा। खटिया पर मरीज को चार किलोमीटर कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ा, जो स्थानीय स्वास्थ्य व उत्तरजीविका की असमानताओं को उजागर करता है।
प्रमुख तथ्य
- बड़ाकांजिया पंचायत के चीटामाटी टोला में बीमार टोला प्रधान जंगल हेम्ब्रम को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
- 108 एंबुलेंस सेवा बार-बार संपर्क के बावजूद मदद नहीं पहुंचा सकी।
- गांव में सड़क न होने के कारण सामान्य वाहन भी चिकित्सीय सहायता के लिए पहुंच नहीं पाए।
- ग्रामीणों ने लकड़ी की खटिया बनाई और मरीज को चार किलोमीटर तक दुर्गम पहाड़ी रास्तों से अस्पताल तक पहुंचाया।
- वर्तमान में जंगल हेम्ब्रम का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज जारी है।
पृष्ठभूमि
चीटामाटी टोला के ग्रामीण दशकों से बुनियादी सड़क सुविधा से वंचित हैं। यहां की पहाड़ी और कंटीली जमीन ने परिवहन की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। इलाज के लिए तत्काल पहुंच अत्यंत आवश्यक होता है, किन्तु सडक न होने के कारण स्वास्थ्य आपातकाल में चिकित्सा सहायता तक पहुंचना मुश्किल है। बारिश के मौसम में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों की स्थिति गंभीर हो जाती है।
नवीनतम घटनाक्रम
जंगल हेम्ब्रम की अचानक तबीयत खराब होने पर 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया गया, लेकिन कोई उपलब्धता नहीं थी। निकटतम ग्रामीणों ने मिलकर एक लकड़ी की खटिया तैयार की और चार किलोमीटर दुर्गम रास्तों से उसे लेकर अस्पताल तक पहुंचे। वहां एक निजी वाहन की व्यवस्था हो सकी जिससे स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां उनका इलाज जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की गंभीर कमी को दर्शाती है।
अधिकारिक बयान
स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। 108 एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की जाएगी ताकि ऐसी स्थिति पुनः न उत्पन्न हो।
जनता पर प्रभाव
यह घटना ग्रामीण जनता के लिए चिंता का विषय बन गई है। वे मानते हैं कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी उनकी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। स्वास्थ्य संकट के समय यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और सशक्त प्रशासन की मांग तेज हो गई है।
आगे क्या होगा?
ग्रामीणों ने प्रशासन से चीटामाटी टोला को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की है। इसके अलावा 108 सेवा की कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच कर उसे द्रुत सुधार की उम्मीद जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में आधारभूत सुविधा सुधार के बिना ग्रामीणों की जीवन गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं।
निष्कर्ष
पोटका में खटिया के सहारे एंबुलेंस होना, ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा की गंभीर चुनौतियों और सड़क अभाव के कारण आपातकालीन सुविधा की कमी की प्रतीक है। समस्या के समाधान के लिए केंद्र और राज्य सरकार को तत्काल प्रभाव से कार्य करना अनिवार्य है ताकि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य एवं परिवहन सेवाएं मिले।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
- प्रश्न - क्या पोटका में सड़क निर्माण योजना है?
उत्तर - प्रशासन द्वारा सड़क निर्माण के लिए योजना बनाई जा रही है, परंतु अभी तक कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। - प्रश्न - 108 एंबुलेंस सेवा ने मदद क्यों नहीं की?
उत्तर - क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण सेवा प्रदान करने में समस्या आई, जिसकी जांच चल रही है। - प्रश्न - अब मरीज की स्थिति कैसी है?
उत्तर - मरीज जंगल हेम्ब्रम का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज जारी है और उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। - प्रश्न - ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा कब तक मिलेगी?
उत्तर - प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जल्द सुधार किया जाएगा, परन्तु निश्चित समय-सीमा नहीं दी गई है। - प्रश्न - क्या अन्य गांवों में भी ऐसी समस्या है?
उत्तर - जी हाँ, झारखंड के कई ग्रामीण इलाकों में ऐसी संकटपूर्ण स्थिति आम है।



