पारडीह-बालीगुमा एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण में अड़चन, वन भूमि डायवर्जन पर सरकार ने NOC से इंकार
JSRnews.com | Local | 26 Jun 2026
परिचय
टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित पारडीह से बालीगुमा तक 4/6 लेन एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना का काम फिर बाधित हो गया है। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए उपयोग में लाई जाने वाली 4.644 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन पर NOC देने से इनकार कर दिया है। इसी कारण से परियोजना की समय-सारणी पर अनिश्चितता बनी हुई है।
मुख्य बिंदु
- 4.644 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन पर झारखंड सरकार ने NOC देने से मना किया है।
- परियोजना का उद्देश्य ट्रैफिक जाम से राहत और रांची-जमशेदपुर के बीच आवागमन सहज बनाना है।
- निर्माण कार्य पहले से विभागीय मंजूरियों और तकनीकी बाधाओं की वजह से प्रभावित है।
- मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (CWLW) की टिप्पणी प्राप्त होने के बाद ही अगला कदम होगा।
पृष्ठभूमि
पारडीह-बालीगुमा मार्ग पर लगभग 10.02 किलोमीटर लंबा यह एलिवेटेड कॉरिडोर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के EPC मोड में विकसित किया जा रहा है। परियोजना का लक्ष्य झामशेदपुर के व्यस्त मार्गों पर लगने वाले जाम को खत्म कर यातायात की सुविधा बढ़ाना है। निर्माण कार्य H.G. इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड को सौंपा गया है।
ताज़ा अपडेट
वन भूमि के उपयोग के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) पर झारखंड सरकार ने फिलहाल स्वीकृति नहीं दी है। इसके पीछे मुख्य कारण है कि राज्य सरकार ने इस प्रस्ताव के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इससे परियोजना का कार्यकाल प्रभावित हो सकता है।
पारडीह-बालीगुमा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना
यह परियोजना ट्रैफिक जाम कम करने के उद्देश्य से डिमना चौक और पारडीह कालीमंदिर से बालीगुमा तक बनेगी। वन क्षेत्र में यूटिलिटी शिफ्टिंग के लिए जमीन के डायवर्जन की पिछली मंजूरियां अभी भी लंबित हैं।
अधिकृत टिप्पणियां
सरकारी सूत्रों ने बताया कि वन भूमि से संबंधित अंतिम निर्णय मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की टिप्पणी के आधार पर लिया जाएगा। फिलहाल NOC के बिना कार्य शुरू नहीं हो सकता। इससे अनुमोदन प्रक्रिया और धीमी पड़ सकती है।
जनता पर प्रभाव
इस परियोजना में देरी के कारण स्थानीय लोग ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और आवागमन समस्या का सामना करते रहेंगे। विशेषकर उन लोगों के लिए यह निराशाजनक है जो दैनिक आधार पर इस मार्ग का उपयोग करते हैं।
आगे क्या होगा?
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही सरकार इस मामले पर अंतिम निर्णय लेगी। यदि NOC जारी हो जाता है, तो निर्माण कार्य फिर से गति पकड़ पाएगा। नहीं तो समय सीमा और भी आगे बढ़ सकती है।
निष्कर्ष
पारडीह-बालीगुमा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना झारखंड के यातायात सुधार में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वन भूमि डायवर्जन को लेकर अभी तक शासन द्वारा सहमति नहीं मिलने के कारण काम में रुकावट बनी हुई है। यह परियोजना तब तक बाधित रह सकती है जब तक सभी अनुमति प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो जातीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- प्रश्न: पारडीह-बालीगुमा एलिवेटेड कॉरिडोर क्या है?
उत्तर: यह एक 4/6 लेन वाली उच्च स्तरीय सड़क परियोजना है जो पारडीह कालीमंदिर से बालीगुमा तक लगभग 10 किलोमीटर लंबी है। - प्रश्न: परियोजना रोक का कारण क्या है?
उत्तर: वन भूमि के डायवर्जन के लिए जरूरी NOC अभी झारखंड सरकार द्वारा जारी नहीं किया गया है। - प्रश्न: NOC न मिलने पर क्या प्रभाव होगा?
उत्तर: इससे निर्माण कार्य रुक जाएगा और परियोजना की समय-सारिणी में देरी होगी। - प्रश्न: वन्यजीव प्रतिपालक की भूमिका क्या है?
उत्तर: CWLW परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का विश्लेषण कर अंतिम टिप्पणी देते हैं, जिसके आधार पर वन विभाग की मंजूरी मिलती है। - प्रश्न: परियोजना का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: क्षेत्र में ट्रैफिक जाम कम करना और झारखंड के दो प्रमुख शहरों के बीच आवागमन को बेहतर बनाना है।



