जामताड़ा के नारायणपुर गांव में पेयजल संकट गंभीर, दो चापाकल खराब
जामताड़ा जिले के नारायणपुर प्रखंड के पिलवारी-शहरपुर वन गांव में पेयजल संकट चरम पर पहुंच चुका है। लगभग 150 लोगों और 25 परिवारों वाले इस छोटे से गांव में पानी की उपलब्धता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। ग्रामीणों की मुक्ति के लिए लगाए गए तीन चापाकलों में से दो पूरी तरह से खराब हो चुके हैं, जबकि तीसरे चापाकल से भी काफी कम पानी निकल रहा है जिससे गांव के लोगों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
JSRnews.com | Local | 27 May 2026
ग्रामीण बताते हैं कि हर गर्मी के मौसम में जलस्तर नीचे गिरने के कारण इस समस्या का सामना करना पड़ता है, लेकिन अभी तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। पानी की किल्लत के चलते गांव के लोग लगभग एक किलोमीटर दूर स्थित जोरिया तक जाकर वहां के डोभा और चट्टानों के बीच बने स्रोत से पानी भरकर लाते हैं। यह पानी पीने, खाना बनाने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है, बावजूद इसके पानी दूषित होने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीण शिवलाल मुर्मू, दर्शन किस्कू, कयुमुद्दीन मियां समेत अन्य लोगों का कहना है कि दूषित पानी के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। केवल एक कार्यशील चापाकल से दो-तीन बाल्टियां पानी ही प्राप्त हो पाती हैं, जो कि पूरे गांव की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है।
इस गंभीर स्थिति को लेकर ग्रामीण प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि खराब चापाकलों की तुरंत मरम्मत की जाए और नए चापाकलों की स्थापना की जाए जिससे स्थायी समाधान हो सके। पिठवाड़ीह-2 के वार्ड सदस्य सुधीर मोहाली ने भी इस समस्या की गंभीरता स्वीकार करते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है।
पीएचईडी विभाग के एसडीओ अशोक पासवान ने बताया कि इस मामले को संज्ञान में लिया गया है तथा खराब चापाकलों की मरम्मत जल्द ही करवाई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की "हर घर जल योजना" के अंतर्गत मौजूद निर्माण कार्य लगभग एक वर्ष में पूरा हो जाएगा, जिसके पूरा होने के बाद क्षेत्र की पेयजल समस्या का स्थायी समाधान सम्भव होगा।
इस समय गांव के लोग जल संकट के कारण भारी परेशानी झेल रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी आपदाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। इसलिए स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों से प्रतीक्षा है कि वे इस आपात स्थिति में तुरंत उचित कदम उठाएं ताकि जामताड़ा के नारायणपुर के ग्रामीणों को स्वच्छ और पर्याप्त पेयजल आसानी से उपलब्ध हो सके।


