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जमशेदपुर के आदिवासी भूमि विवाद में पुलिस की मिलीभगत, ग्राम सभा ने उपायुक्त से गुहार लगाई

जमशेदपुर के आदिवासी भूमि विवाद में पुलिस की मिलीभगत, ग्राम सभा ने उपायुक्त से गुहार लगाई

JSRnews.com  |  Local  |  24 Jul 2026

परिचय
जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम जिले के जसकंडीह गांव में आदिवासी भूमि को लेकर एक नया विवाद उभरकर सामने आया है। ग्राम सभा ने उपायुक्त और अंचल अधिकारी को पत्र सौंपकर स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।

मुख्य अंश

  • ग्राम सभा ने परसुडीह थाना के दो पुलिसकर्मियों पर माफियाओं के साथ मिलकर आदिवासी जमीन पर अवैध कब्जा कराने का आरोप लगाया।
  • सूचना बोर्ड हटाने का दबाव और भूमि विवाद की पारंपरिक अधिकार प्रणाली में पुलिस की दखलंदाजी पर सवाल उठे।
  • ग्राम सभा ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और भूमि सुरक्षा की मांग की है।

पृष्ठभूमि

आदिवासी भूमि की सुरक्षा झारखंड के लिए एक संवेदनशील विषय रही है। विशेष रूप से पूर्वी सिंहभूम के जसकंडीह जैसे इलाकों में भूमि अधिग्रहण और कब्जे से जुड़े विवाद पहले भी सामने आ चुके हैं। अधिनियम सीएनटी, पेसा कानून 1996 और नए झारखंड पेसा नियमावली 2026 के तहत आदिवासियों की जमीनों की रक्षा का प्रावधान है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके क्रियान्वयन में अक्सर चुनौतियां रहती हैं।

ताज़ा अपडेट्स

ग्राम सभा द्वारा उपायुक्त और अंचल अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि पुलिसकर्मी विवादित जमीन के रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर माफियाओं के साथ मिलकर जमीन कब्जा कराने की कोशिश कर रहे हैं। इस जमीन पर पहले से सूचना बोर्ड लगा हुआ था ताकि विवाद के समाधान तक किसी प्रकार का निर्माण न हो, लेकिन उसे हटाने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

इसके साथ ही पुलिसकर्मियों ने ग्राम सभा के सदस्य हातु मुंडा जगन्नाथ देवगम को धमकाने और झूठे मुकदमे में फंसाने की चेतावनी देने का भी आरोप लगाया गया है। पिछले महीने से इन पुलिसकर्मियों द्वारा हाथु मुंडा को थाने बुलाने के कई प्रयास किए गए, जबकि ग्राम सभा ने स्पष्ट किया था कि विवाद का समाधान केवल राजस्व अधिकारियों और ग्राम सभा के माध्यम से किया जाना चाहिए।

आधिकारिक बयान

खबर लिखे जाने तक पुलिस प्रशासन की तरफ से इस मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।

जनता पर प्रभाव

आदिवासी भूमि विवाद में स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्राम सभा ने पुलिस पर लगे आरोपों के बाद सुरक्षा और न्याय की मांग को लेकर आवाज बुलंद की है। इस विवाद का निष्पक्ष समाधान न होने पर सामाजिक तनाव और बढ़ सकता है।

आगे क्या होगा?

ग्राम सभा की मांग है कि मामले की तुरंत जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही आदिवासी भूमि को अवैध रूप से कब्जा से बचाने के लिए कानूनी प्रावधानों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए। सरकार और प्रशासन की ओर से इस विवाद का स्थायी समाधान अपेक्षित है।

निष्कर्ष

जमशेदपुर के इस आदिवासी भूमि विवाद ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम सभा की न्याय की मांग आवश्यक है ताकि क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनी रहे। यह मामला आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण चुनौती पेश करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • प्रश्न: विवादित जमीन किस इलाके में स्थित है?
    उत्तर: पूर्वी सिंहभूम जिले के जसकंडीह गांव में।
  • प्रश्न: पुलिस पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
    उत्तर: पुलिसकर्मियों पर माफियाओं के साथ मिलकर जमीन पर कब्जा कराने और ग्राम सभा के सदस्यों को धमकाने का आरोप है।
  • प्रश्न: ग्राम सभा ने क्या मांग की है?
    उत्तर: मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और आदिवासी भूमि संरक्षण का आग्रह।
  • प्रश्न: क्या पुलिस प्रशासन ने कोई जवाब दिया है?
    उत्तर: अभी तक पुलिस प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
  • प्रश्न: कौन से कानून आदिवासी भूमि की सुरक्षा करते हैं?
    उत्तर: संविधान के तहत CNT अधिनियम, पेसा कानून 1996 और झारखंड पेसा नियमावली 2026।
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JSRNews ब्यूरो
JSRNews ब्यूरो JSRnews.com की टीम के सदस्य हैं। जमशेदपुर और झारखंड की ताज़ा खबरें, स्थानीय मुद्दे और विकास की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञ।
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