गिरिडीह के 40 आदिवासी परिवारों को तीन किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है पानी
झारखंड के गिरिडीह जिले के डुमरी प्रखंड के आदिवासी बहुल झरना गांव में भारी पेयजल संकट के कारण लोग त्राहिमाम कर रहे हैं। यहां के करीब 40 परिवारों के लिए पेयजल उपलब्धता अब एक बड़ी समस्या बन गई है। गांव में न तो कोई चालू चापाकल है और न ही बोरिंग से पानी निकाला जा पा रहा है। इस वजह से ग्रामीणों को रोजाना तीन किलोमीटर दूर जंगल और पहाड़ी रास्तों से पानी लाने का कष्ट उठाना पड़ रहा है।
JSRnews.com | Local | 27 May 2026
जंगल के बीच स्थित डाडी में सीमित मात्रा में जमा पानी ही ग्रामीणों का सहारा है, जिसका उपयोग वे दिनभर के लिए करते हैं। स्थानीय महिलाएं बताती हैं कि तपती धूप में सिर पर मटका रखकर ऊबड़खाबड़ रास्तों से पानी लाना अत्यंत कठिन है और कई बार गिरने का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद पानी का अभाव उन्हें मजबूर कर देता है कि वे इस जोखिम को उठाएं।
चापाकल और बोरिंग की विफलता
करीब पांच साल पहले इस गांव में बोरिंग की गई थी, लेकिन 300 फीट खुदाई के बाद भी पानी नहीं निकला। नल-जल योजना भी अधूरी है और यहां आज भी कोई चालू चापाकल नहीं है। पंचायत प्रतिनिधियों ने विभागों को कई बार समस्या से अवगत कराया है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। इस पेयजल संकट ने गांव के सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया है। शादी-विवाह आदि समारोहों में भी पानी की कमी से आयोजन प्रभावित हो रहे हैं और बाहर से आये रिश्तेदार पानी की स्थिति देखकर रिश्ता करने से मना कर देते हैं।
सरकार से समाधान की प्रतीक्षा
ग्रामीणों की मांग है कि सरकार इस भीषण गर्मी में जल संकट को समझते हुए जलापूर्ति का स्थायी समाधान निकाले। पंचायत समिति सदस्य सत्यनारायण महतो कहते हैं कि पास के डाडी से पाइपलाइन लगाकर पानी की आपूर्ति की जा सकती है, लेकिन इसके लिए विभाग को सक्रिय होना होगा। पीएचडी विभाग के जेई जयप्रकाश यादव ने भी अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है और समाधान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
झरना गांव के 250 से 300 लोग फिलहाल तीन किलोमीटर दूर स्थित नदी और जंगल से पानी लाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं, जोकि उनके लिए दिनदिन बढ़ती गर्मी और पेयजल संकट के कारण बेहद कष्टदायक स्थिति है। प्रशासन की चुप्पी और सुविधा की कमी ने इन्हें जिंदगी को एक चुनौती बना दिया है। ग्रामीण आशा करते हैं कि जल्द ही सरकार उनकी पीड़ा को समझेगी और इस जल संकट का स्थायी समाधान निकलेगा जिससे उनका जीवन सामान्य हो सके।


