गढ़वा में शिक्षक का घोड़े पर जनगणना का अनोखा वीडियो हुआ वायरल
गढ़वा जिले से एक अनोखी और चर्चा में आने वाली तस्वीर सामने आई है, जहां एक शिक्षक घोड़े की पीठ पर सवार होकर गांव-गांव जनगणना का काम कर रहे हैं। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तेजी से तहलका मचा दिया है और महंगे पेट्रोल-डीजल के दौर में लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
JSRnews.com | Local | 27 May 2026
राजकीय उत्क्रमित उच्च विद्यालय टाटीदिरी के सहायक शिक्षक मुन्ना प्रसाद गुप्ता को 16 मई से मकान सूचीकरण और जनगणना का कार्य सौंपा गया है। उनका कार्यक्षेत्र पनघटवा और आसपास के दुर्गम गांव हैं, जहां रास्ते संकरी और कच्चे होने के कारण सामान्य वाहनों का पहुंचना मुश्किल है। इस चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में मुन्ना प्रसाद ने अपने पुराने घोड़े को फिर से काम में लगाया, जो अब उनका सबसे भरोसेमंद साथी बन गया है।
महंगे ईंधन के बीच सस्ता और असरदार तरीका
मुन्ना प्रसाद ने बताया कि घोड़े पर सवार होकर गांव-गांव पहुंचना सस्ता होने के साथ-साथ समय भी बचाता है। पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों को देखते हुए यह तरीका उनके लिए व्यवहारिक विकल्प साबित हुआ है। वीडियो में वह हाथ में कागजात लेकर, संकरी पगडंडियों और ऊंचाईयों वाले इलाकों से गुजरते हुए नजर आते हैं। यह तरीका न सिर्फ बेहतर पहुंच सुनिश्चित करता है बल्कि दुर्गम इलाकों में जनगणना का काम भी सुगमता से पूरा करवाता है।
गांव के लोगों और अधिकारियों से मिली सराहना
इस वीडियो को स्थानीय लोग और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता खूब पसंद कर रहे हैं। कई ग्रामीण उत्सुकता से इस अनोखे तरीके को देख रहे हैं, तो कई लोग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर भी साझा कर रहे हैं। जिलाध्यक्ष शिक्षा पदाधिकारी कैसर रजा ने इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह न केवल ईंधन बचाने में मददगार है, बल्कि जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का शानदार उदाहरण भी है।
सोशल मीडिया पर लोग इसे 'देसी जुगाड़' बताते हुए इसके साथ जुड़े जमीनी इनोवेशन की भी सराहना कर रहे हैं। मुन्ना प्रसाद गुप्ता का यह उदाहरण दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर इच्छा शक्ति हो तो नई राहें बनाई जा सकती हैं और काम को बेहतर बनाया जा सकता है।
सामान्य जनगणना के दौरान ऐसे अभिनव कदम न केवल स्थानीय लोगों के लिए सुविधा बढ़ाते हैं, बल्कि देश के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में उपलब्ध संसाधनों के बुद्धिमानी से उपयोग का उदाहरण भी प्रस्तुत करते हैं। गढ़वा में घोड़े पर जनगणना करने वाले इस शिक्षक की कहानी अब एक मिसाल बन चुकी है, जो समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।


