धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना: AAI ने 19 आपत्तियों के जवाब दिए, पर्यावरण मंजूरी की उम्मीद बढ़ी
JSRnews.com | Local | 01 Aug 2026
परिचय
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना ने अपनी एक आवश्यक मोड़ पर कदम रखा है, जब भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सामने 19 पर्यावरणीय आपत्तियों का विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया। यह प्रोजेक्ट लंबे समय से वन भूमि और पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया में अटका हुआ था।
प्रमुख बिंदु
- AAI ने 19 पर्यावरणीय आपत्तियों का बिंदुवार जवाब दिया।
- परियोजना WWII के दौरान बने निष्क्रिय हवाई पट्टी के पुनर्विकास पर आधारित।
- 99.256 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग की योजना जिसमें 90.087 हेक्टेयर ऑपरेशनल एरिया होगा।
- परियोजना का लाभ लागत अनुपात 1:48.6 बताया गया है।
- हाथी कॉरिडोर सुरक्षा हेतु वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान बनेगा।
- एयरपोर्ट से क्षेत्रीय आर्थिक और रोजगार वृद्धि की उम्मीद।
पृष्ठभूमि
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना की घोषणा 2019 में केंद्रीय सरकार की उड़ान (UDAN) योजना के तहत की गई थी। इसे मौजूदा जमशेदपुर के सोनारी एरोड्रोम के विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया, क्योंकि सोनारी रनवे छोटा और घनी आबादी में स्थित है, जो व्यावसायिक विमानों के लिए उपयुक्त नहीं। हालांकि परियोजना क्षेत्र में वन भूमि और हाथी कॉरिडोर के कारण सुरक्षात्मक चिंताएं उत्पन्न हुईं।
ताजा अपडेट
AAI ने बीते दिनों रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट निदेशक के माध्यम से जमशेदपुर के डीएफओ को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, वन भूमि डायवर्जन, पेड़ों की सुरक्षा, जल संरक्षण और हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा पर विस्तार से समाधान दिए गए। AAI ने प्रस्तावित वन भूमि के लिए महत्वपूर्ण राजस्व और सामाजिक लाभ का भी आंकलन किया है।
आधिकारिक बयान
AAI ने स्पष्ट किया है कि स्वीकृत परियोजना की सीमा के बाहर अतिरिक्त वन भूमि का उपयोग बिना अनुमति नहीं होगा। साथ ही उन्होंने मृदा अपरदन रोकने, जल संरक्षण, और क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है। हाथी कॉरिडोर को संरक्षित रखने के लिए राज्य वन विभाग और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के साथ मिलकर साइट-विशिष्ट वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा, जिसका पूरा खर्च AAI उठाएगा।
जनता पर प्रभाव
परियोजना के पूर्ण होने से पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला खरसावां जिलों के साथ पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्र सीधे हवाई संपर्क से जुड़ेंगे। अनुमान है कि प्रारंभिक चरणों में प्रतिवर्ष लगभग 52,000 यात्री इस एयरपोर्ट का उपयोग करेंगे। इससे स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी, निर्माण कार्य में करीब 250 श्रमिकों को रोजगार मिलेगा, तथा एयरपोर्ट संचालन में स्थायी रूप से लगभग 50 पद सृजित होंगे। साथ ही परिवहन, लॉजिस्टिक्स, होटल व्यवसाय, और स्थानीय सेवा क्षेत्र को भी विकास मिलेगा।
आगे क्या होगा?
AAI द्वारा 19 आपत्तियों के जवाब और अनुपालन रिपोर्ट जमा करने के बाद इस परियोजना को जल्द वन मंजूरी मिलने की संभावना काफी मजबूत हो गई है। अब पर्यावरण मंत्रालय द्वारा अंतिम मंजूरी के कदम पर नजर रखा जा रहा है, जिसके बाद निर्माण कार्य तेज़ गति से शुरू हो सकेगा।
निष्कर्ष
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना न केवल स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर आर्थिक विकास को बढ़ावा देगी, बल्कि वन संरक्षण के साथ संतुलन बनाकर पर्यावरणीय सम्मान भी सुनिश्चित करेगी। AAI की प्रतिबद्धता पर्यावरणीय चुनौतियों को पार करते हुए इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सफल बनाने की दिशा में अहम कदम है।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
- धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह जमशेदपुर समेत आसपास के क्षेत्रों को बेहतर हवाई संपर्क प्रदान करने वाली प्रमुख परियोजना है। - परियोजना में कितनी वन भूमि प्रभावित होगी?
कुल 99.256 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग प्रस्तावित है, जिसमें से अधिकांश ऑपरेशनल क्षेत्र के लिए है। - हाथी कॉरिडोर की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
राज्य वन विभाग और वन्यजीव प्राधिकरण के साथ मिलकर वाइल्डलाइफ मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाएगा। - परियोजना के आर्थिक लाभ क्या हैं?
परियोजना से लगभग 1,438 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ 50 वर्षों में होगा। - परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी की स्थिति क्या है?
AAI द्वारा सभी आपत्तियों के जवाब देने के बाद मंजूरी मिलने की संभावना बढ़ी है।



