नाम्या स्माइल फाउंडेशन ने आशीष घोष को दी व्हीलचेयर, जीवन बना आसान
JSRnews.com | Local | 01 Aug 2026
परिचय: पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांधा प्रखंड के कोईमा गांव में रहने वाले 26 वर्षीय दिव्यांग युवक आशीष घोष को नाम्या स्माइल फाउंडेशन द्वारा व्हीलचेयर प्रदान की गई है। यह पहल स्थानीय समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सहायता का उदाहरण है।
मुख्य बिंदु
- नाम्या स्माइल फाउंडेशन के संस्थापक कुणाल षाड़ंगी ने दी व्हीलचेयर।
- आशीष घोष की स्थिति का पता झामुमो कार्यकर्ता बेनुधर घोष ने लगाया।
- स्थानीय ग्रामीणों और नेताओं ने इस मानवीय प्रयास की सराहना की।
पृष्ठभूमि
पूर्वी सिंहभूम जिले में दिव्यांग व्यक्तियों की जीवनशैली में सुधार के लिए विभिन्न सामाजिक संस्थान काम कर रहे हैं। ऐसे प्रयासों के तहत, नाम्या स्माइल फाउंडेशन ने विशेष रूप से जरूरतमंदों के लिए संसाधन उपलब्ध कराने का कार्य किया है।
नाम्या स्माइल फाउंडेशन और उनकी भूमिका
संस्था के संस्थापक कुणाल षाड़ंगी को स्थानीय स्तर पर समाजसेवा के लिए जाना जाता है, जिन्होंने आशीष घोष को व्हीलचेयर उपलब्ध कराकर उसकी जीवन में स्वावलंबन बढ़ाने का प्रयास किया है।
ताज़ा अपडेट्स
कोईमा गांव के दिव्यांग युवक आशीष घोष को व्हीलचेयर मिलने से उनकी आवाजाही में सुधार हुआ है। इससे उनकी जिंदगी के दैनिक कार्य सरल हुए हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
आधिकारिक बयान
कुणाल षाड़ंगी ने कहा, “समाज में जरूरतमंद और दिव्यांगजनों की सहायता करना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। व्हीलचेयर से आशा है कि आशीष का जीवन आसान और स्वतंत्र होगा।” स्थानीय विधायक और झामुमो के कार्यकर्ता भी इस पहल की कड़ी प्रशंसा कर रहे हैं।
जनता पर प्रभाव
इस पहल ने गांव में सकारात्मक माहौल बनाया है। स्थानीय लोगों ने भी इस सामाजिक कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की मदद से दिव्यांगों का जीवन बेहतर बनता है।
आगे क्या होगा?
नाम्या स्माइल फाउंडेशन अन्य ग्रामीण इलाकों में भी ऐसे सामाजिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की योजना बना रही है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को जीवन की सहूलियतें मिल सकें।
निष्कर्ष
पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांधा में नाम्या स्माइल फाउंडेशन की यह पहल समाज में सहानुभूति और सहयोग की भावना को प्रबल करती है, जिससे दिव्यांग लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- नाम्या स्माइल फाउंडेशन क्या है? एक सामाजिक संस्था जो जरूरतमंदों और दिव्यांगों की सहायता करती है।
- व्हीलचेयर मिलने से आशीष की जिंदगी में क्या बदलाव आया है? उनकी आवाजाही आसान हुई है जिससे जीवन के रोज़मर्रा के कामों में मदद मिली है।
- इस पहल में समुदाय की भूमिका क्या रही? स्थानीय लोगों और नेताओं ने इस पहल का समर्थन और प्रशंसा की।
- क्या नाम्या स्माइल फाउंडेशन आगे भी ऐसे प्रयास करेगा? हाँ, वे अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की मदद पहुंचाने की योजना बना रहे हैं।
- कौन से अन्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल थे? झामुमो के स्थानीय कार्यकर्ता और कई ग्रामस्थ भी इस कार्य में उपस्थित रहे।



