चांडिल डैम के फाटक खुलने से जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में बढ़ा बाढ़ का खतरा
JSRnews.com | Local | 31 Jul 2026
परिचय:
कोल्हान क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां जिलों में बाढ़ का खतरा गंभीर रूप से बढ़ गया है। चांडिल डैम का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ रहा है कि इसे नियंत्रित करने हेतु डैम के दस फाटक खोलने पड़े हैं। यह कदम नदियों के जलस्तर पर असर डालने और आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ रोकने के लिए उठाया गया है।
मुख्य बिंदु:
- चांडिल डैम के 10 फाटक खोलकर जलस्तर नियंत्रित किया जा रहा है।
- जलस्तर 179.33 मीटर तक पहुंचने पर ईचागढ़ विधानसभा के गांवों में बाढ़ का खतरा।
- जमशेदपुर क्षेत्र में स्वर्णरेखा और खरकाई नदियों का जलस्तर बढ़ा।
- स्थानीय विधायक सविता महतो ने डैम का निरीक्षण कर प्रशासन के साथ समन्वय बढ़ाया।
- डैम प्रबंधन ने फाटक खोलने और बंद करने की प्रक्रियाएं बाढ़ प्रभावित इलाकों की सुरक्षा के लिए शुरू की हैं।
पृष्ठभूमि:
कोल्हान क्षेत्र मानसून के दौरान भारी बारिश पाने वाले इलाकों में आता है। पिछले कुछ दिनों से होने वाली लगातार बारिश ने क्षेत्र के जल निकासी तंत्र पर दबाव बढ़ा दिया है। चांडिल डैम, जो इस इलाके में नदी जल का संग्रह और नियंत्रक है, का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। डैम में पानी की अधिक मात्रा जमा होने से फाटक खोलना आवश्यक हो गया है ताकि डैम टूटने या गंभीर नुकसान से बचा जा सके।
ताजा अपडेट:
डैम प्रबंधन और जिला प्रशासन द्वारा मिलकर पानी के स्तर को नियंत्रित करने का प्रयास जारी है। डैम के खोलने से जमशेदपुर की नदियाँ जैसे स्वर्णरेखा और खरकाई भी उफान पर हैं। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। खतरनाक स्तर तक जलस्तर बढ़نے पर आवश्यक होने पर लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की तैयारियां भी जारी हैं।
अधिकारिक बयान:
सरायकेला-खरसावां की विधायक सविता महतो ने अपने दौरे के दौरान कहा, "हम जलस्तर को 180 मीटर से नीचे रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं ताकि आसपास के गांवों को बाढ़ से बचाया जा सके। प्रशासन और डैम प्रबंधन पूरी सतर्कता से स्थिति पर निगरानी रखे हुए हैं।"
प्रभावित जनजीवन:
चांडिल डैम के फाटक खुलने से प्रभावित क्षेत्रों के लोग चिंतित हैं। किसानों की फसलें और ग्रामीण इलाकों की बस्तियाँ बाढ़ के जोखिम में हैं। स्थानीय प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में सहायता कैम्प स्थापित करने की भी तैयारी की जा रही है। इस बीच, लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे न जाएँ और आवश्यक सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
आगे क्या होगा?
बरसात जारी रहने की संभावना को देखते हुए डैम प्रबंधन और जिला प्रशासन सतत निगरानी रखेगा। जलस्तर नियंत्रण के लिए फाटक खोलने और बंद करने की प्रक्रिया मौसम की स्थितियों के अनुसार अपनाई जाएगी। जन सुरक्षा के लिए अलर्ट जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का प्रबंध होगा।
निष्कर्ष:
चांडिल डैम के फाटक खुलने से जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में बाढ़ का खतरा स्पष्ट हो गया है। लगातार बढ़ रहे जल स्तर और भारी बारिश के कारण प्रशासन और स्थानीय विधायक मिलकर इस स्थिति को संभालने में जुटे हुए हैं। जनता से भी सावधानी बरतने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है ताकि किसी भी अप्रिय परिस्थिति से निपटा जा सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ):
- चांडिल डैम के फाटक कितने खोलें गए हैं? कुल दस फाटक खोलकर जलस्तर नियंत्रित किया जा रहा है।
- जलस्तर कितना बढ़ने पर बाढ़ की स्थिति बनी? जब जलस्तर 179.33 मीटर के करीब पहुंचता है तो बाढ़ का खतरा बढ़ता है।
- स्थानीय प्रशासन क्या कदम उठा रहा है? प्रशासन सतर्क है, प्रभावित इलाकों में मदद और सुरक्षा के इंतजाम कर रहा है।
- क्या जमशेदपुर के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा है? हाँ, स्वर्णरेखा और खरकाई नदियों के जलस्तर बढ़ने से खतरा बना हुआ है।
- जनता को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए? नदी किनारे जाने से बचें, प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और कोई भी आपात स्थिति रिपोर्ट करें।



