भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ संयुक्त किसान मोर्चा ने किया जोरदार प्रदर्शन
JSRnews.com | Politics | 22 Jul 2026
परिचय
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रस्ताव के तहत किसानों और मजदूरों के हितों को खतरे में बताते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), पूर्वी सिंहभूम ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। बुधवार को उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंप कर संगठन ने इस समझौते के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इसे लागू किया तो व्यापक आंदोलन होगा।
मुख्य बातें
- एसकेएम ने व्यापार समझौते को कृषि और मजदूर हितों के खिलाफ बताया।
- अमेरिका से सस्ते कृषि और औद्योगिक उत्पाद आने से किसानों की आमदनी पर संकट।
- भारत और अमेरिका की कृषि व्यवस्था में बुनियादी अंतर को रेखांकित किया।
- सरकार से समझौता पुनः विचार करने और किसानों की सुरक्षा की मांग।
पृष्ठभूमि
भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते में आयात शुल्क कम करने की बात कही गई है, जिसमें विशेषकर कृषि उत्पाद शामिल हैं। भारत में कृषि क्षेत्र की व्यापकता और छोटे कृषकों की संख्या को देखते हुए इस समझौते को लेकर किसानों को संदेह एवं चिंता है। अमेरिका में सरकारी सब्सिडी के कारण कृषि लागत कम है, जबकि भारत में किसान महँगी उत्पादन लागत और घटते दामों की समस्या से जूझ रहे हैं।
नवीनतम अपडेट
संयुक्त किसान मोर्चा ने बताया कि समझौते की वजह से अमेरिकी गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन, फल-सब्जी, डेयरी उत्पाद और पोल्ट्री जैसे वस्तुएं सस्ते दाम पर आसानी से भारतीय बाजार में उपलब्ध हो सकती हैं, जिससे स्थानीय किसानों को अपनी उपज के लिए उचित कीमत नहीं मिल पाएगी। इसके परिणामस्वरूप किसानों की आर्थिक स्थिति और कमजोर होगी।
अधिकारियों के बयान
संयुक्त किसान मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा, "भारत और अमेरिका की कृषि नीति और किसान संरचना में गहरा अंतर है। यहां छोटे और सीमांत किसान हैं, जिन्हें सरकारी सब्सिडी जैसी सहायताएं नहीं मिलतीं, जबकि अमेरिका में दो प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है और उन्हें भारी सब्सिडी प्राप्त होती है। इसलिए ऐसे समझौते को लागू करना ठीक नहीं होगा।"
जनता पर प्रभाव
इस व्यापार समझौते के लागू होने से छोटे किसान तथा मजदूर वर्ग प्रभावित होंगे। उर्जा, खाद्य और कृषि उत्पादन लागत पहले ही महंगी हो चुकी है, अब विदेशी सस्ते उत्पाद आने से स्थानीय मार्केट दबाव में आ जाएगा। किसान अपनी आजीविका खोने के डर से चिंतित हैं और इसका व्यापक असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
आगे क्या होगा?
संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति से इस समझौते पर पुनर्विचार करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग नहीं मानी गई, तो देशव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा। सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर और गरमाने की संभावना है।
निष्कर्ष
भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों के हितों को लेकर विवादास्पद बना हुआ है। संयुक्त किसान मोर्चा की सक्रियता और उनकी मांगें इस मुद्दे को व्यापक दर्शाती हैं। सरकार की नीति से जुड़ी इस बहस में किसानों की सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता सर्वोपरि होनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- प्रश्न: संयुक्त किसान मोर्चा कौन हैं?
उत्तर: यह विभिन्न किसान संगठनों का गठबंधन है जो किसानों के हितों की रक्षा करते हैं। - प्रश्न: भारत-अमेरिका व्यापार समझौता क्या है?
उत्तर: यह एक प्रस्तावित समझौता है जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापारिक शुल्क कम करने पर बातचीत हो रही है। - प्रश्न: समझौता किसानों को क्यों प्रभावित करता है?
उत्तर: इससे विदेशी कृषि उत्पाद सस्ते हो जाएंगे, जिससे भारतीय किसानों की कीमतें गिर सकती हैं। - प्रश्न: सरकार ने अब तक क्या प्रतिक्रिया दी है?
उत्तर: अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। - प्रश्न: आगे क्या कार्रवाई हो सकती है?
उत्तर: यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो किसान मोर्चा देशव्यापी आंदोलन कर सकता है।



