सारईकेला में अवैध खनन पर कड़ी कार्रवाई: बालू खनन पर एनजीटी के तहत पूरा प्रतिबंध
JSRnews.com | Local | 24 Jun 2026
परिचय
झारखंड के सारईकेला जिले में अवैध खनन और बालू की निकासी पर जिला प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। एनजीटी की अवधि में नदी तल से बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। प्रशासन ने इस संबंध में संयुक्त छापेमारी के निर्देश भी जारी किए हैं।
मुख्य बिंदु
- एनजीटी अवधि में नदी तल से बालू खनन पूरी तरह प्रतिबंधित।
- अवैध खनन और खनिज परिवहन की रोकथाम के लिए जीरो टॉलरेंस नीति।
- पुलिस और विभागों को संयुक्त छापेमारी का निर्देश।
- खन पट्टा क्षेत्रों और ईंट भट्टों का मैपिंग पूरा।
- ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना बालू घाट संचालित नहीं होंगे।
पृष्ठभूमि
सारईकेला जिला झारखंड का खनन प्रमुख क्षेत्र है जहां अवैध खनन और खनिजों के गैरकानूनी परिवहन की शिकायतें बढ़ती जा रही थीं। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने हेतु एनजीटी (एनवायरनमेंटल ग्लोबल ट्रिब्यूनल) ने बालू खनन पर विशेष रोक लगाई है। इससे पहले भी कई जिलों में इस तरह की कार्रवाई हुई है, अब सारईकेला में भी प्रशासन ने अपनी भूमिका मजबूत की है।
अद्यतन जानकारी
हाल ही में जिला स्तरीय खनन टास्क फोर्स की बैठक समाहरणालय सभागार में हुई जिसमें उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी मौजूद थे। बैठक में निर्णय लिया गया कि खनन एवं खनिजों की अवैध गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाएगी और सूचना तंत्र को मजबूत किया जाएगा।
खन पट्टा क्षेत्रों और ईंट भट्टों का मैपिंग कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही स्टोन क्रशर एवं डीलर लाइसेंसधारियों को भी मैपिंग में शामिल किया जाएगा। सभी प्रखंडों के लिए स्पष्ट सीमांकन रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
अधिकारिक बयान
उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा कि "एनजीटी के निर्देशानुसार नदी तल से बालू खनन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति जारी रहेगी।" जिला खनन पदाधिकारी ज्योति शंकर शतपथि ने कहा, "खन पट्टा क्षेत्र व ईंट भट्टों की मैपिंग पूर्ण हो चुकी है। यह कार्य अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण में मदद करेगा।"
जनता पर प्रभाव
यह प्रतिबंध स्थानीय आबादी के लिए पर्यावरण सुरक्षा और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बालू खनन की अवैध गतिविधियों से नदियों के जीवन चक्र और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचता था। अब इन प्रतिबंधों से नदी और आसपास के क्षेत्र में सुधार की उम्मीद है। इसके साथ ही ईंट भट्टों पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच से प्रदूषण स्तर कम होने की संभावना है।
आगे की कार्रवाई
जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को खनिज और बालू परिवहन में लगे वाहनों की नियमित जांच और तिरपाल से ढकने का निर्देश दिया है। मासिक रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने को कहा गया है। साथ ही पाटा टोल प्लाजा से लंबित वीडियो फुटेज जल्द उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया गया है। ग्राम सभा की सहमति के बिना बालू घाट संचालित नहीं होंगे जिससे स्थानीय स्तर पर पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित हो सके।
निष्कर्ष
सारईकेला जिला प्रशासन की यह पहल अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए अहम मानी जा रही है। एनजीटी के निर्देशानुसार बालू खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और संयुक्त छापेमारी से पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा। साथ ही खनिज संसाधनों का उचित प्रबंधन सुनिश्चित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- प्रशासन ने बालू खनन पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
बालू खनन से नदी तलों और पारिस्थितिकी तंत्र को क्षति पहुंचती है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबंध आवश्यक है। - क्या अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी?
हाँ, जिला प्रशासन ने अवैध उत्खनन और खनिज परिवहन पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। - क्या बालू घाटों के संचालन के लिए ग्राम सभा की अनुमति जरूरी है?
हाँ, नीलामी पूरी बालू घाटों के संचालन हेतु ग्राम सभा की स्वीकृति आवश्यक है। - क्या खनिज परिवहन वाहन नियमित जांच में शामिल होंगे?
हाँ, जिला परिवहन पदाधिकारी को खनिज वाहनों की जांच और मासिक रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। - ईंट भट्टों की जांच कौन करेगा?
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड शेष ईंट भट्टों का निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।



