UPI Payment Charge: 2000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट शुल्क लागू हो सकता है
JSRnews.com | Business | 05 Aug 2026
परिचय
देश के डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय तरीकों में से एक यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के व्यापारिक लेनदेन में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। केंद्र सरकार बड़ी संख्या में कारोबार के लिए 2,000 रुपये से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) परिचालित करने पर गौर कर रही है।
प्रमुख बिंदु
- 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक शुल्क लगाया जा सकता है।
- आम उपभोक्ता और छोटे कारोबारी इस परिवर्तन से अप्रभावित रहेंगे।
- 95% से अधिक ट्रांजैक्शन, जो 2000 रुपये से कम हैं, शुल्क मुक्त रहेंगे।
- बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को इस नए मॉडल में आर्थिक राहत मिलेगी।
- जुलाई 2023 में कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन लगभग 23.7 अरब और लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये के मूल्य के थे।
पृष्ठभूमि
डिजिटल लेनदेन के क्षेत्र में UPI ने पिछले दशक में क्रांति ला दी है। भारत सरकार और रिजर्व बैंक इसके विस्तार और सुदृढ़ता के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। लेकिन इस नेटवर्क को संचालित रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सुरक्षा पर भारी खर्च होता है। इस लागत को पूरा करने के लिए सरकार मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने की योजना बना रही है।
हालिया अपडेट
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में “टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल” पेश किया है, जिसमें डिजिटल पेमेंट्स पर बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए ‘शून्य-MDR’ नीति में बदलाव का प्रस्ताव शामिल है। अगर यह बिल पारित हो जाता है तो सरकार को मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का अधिकार प्राप्त होगा।
सरकारी अधिकारी व विशेषज्ञ के बयान
अर्थशास्त्री और डिजिटल वित्त विशेषज्ञ बताते हैं कि तेजी से बढ़ते यूपीआई नेटवर्क की सुरक्षा और उल्लेखनीय संख्या में लेनदेन के संचालन में बढ़ती लागत के कारण यह जरूरी हो गया है कि फीस संरचना में संशोधन हो। इससे वित्तीय संस्थानों को स्थिरता मिलेगी और डिजिटल भुगतान प्रणाली मजबूत होगी।
जनता पर प्रभाव
आम उपभोक्ताओं के लिए यह प्रस्ताव परेशानी का कारण नहीं बनेगा क्योंकि छोटे और दैनिक लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। छोटे व्यापारी, किराना दुकानदार, ऑटो व टैक्सी चालक जैसे वर्ग इसके बाहर रहेंगे। बड़ी मात्रा में मर्चेंट लेनदेन पर यह शुल्क लागू होगा, जो कुल ट्रांजैक्शन में संख्या के हिसाब से 5% है पर कुल मूल्य का 65% हिस्सा है।
आगे क्या होगा
सरकार अभी मर्चेंट चार्जिंग मॉडल को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। इसके लिए आगामी संसद सत्र में चर्चा होगी और विधेयक पारित होने के बाद ही इसकी कार्यान्वयन तिथि घोषित की जाएगी। उपयोगकर्ताओं को सूचित करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
निष्कर्ष
UPI पेमेंट चार्ज की यह योजना डिजिटल भुगतान की स्थिरता और बढ़ती सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि यह बदलाव बड़े व्यापारिक लेनदेन को प्रभावित करेगा, आम जनता के लिए यह सुविधा मुफ्त बनी रहेगी। इससे भारत के डिजिटल लेनदेन के ढांचे में मजबूती आएगी और बैंकिंग तथा फिनटेक कंपनियों के लिए आर्थिक संतुलन सुनिश्चित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या सभी UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगेगा? नहीं, केवल 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक ट्रांजैक्शन पर इस शुल्क का प्रस्ताव है।
- छोटे व्यापारियों पर इसका क्या असर होगा? 2,000 रुपये से कम के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, अतः छोटे व्यापारी अप्रभावित रहेंगे।
- यह नया MDR कब से लागू होगा? अभी इसकी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
- आम जनता क्या फर्क महसूस करेगी? आम रोजमर्रा के ट्रांजैक्शन बिल्कुल मुफ्त रहेंगे, इसलिए असर नहीं होगा।
- सरकार MDR शुल्क क्यों लगा रही है? डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत और सुरक्षा के कारण खर्चों की पूर्ति के लिए यह कदम जरूरी समझा जा रहा है।



