दक्षिण पूर्व रेलवे में स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता से बिजली खपत में पारदर्शिता बढ़ेगी
JSRnews.com | National | 24 Jun 2026
परिचय
दक्षिण पूर्व रेलवे ने हाल ही में अपने परिसरों में स्मार्ट मीटर को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। इस कदम के तहत रेलवे क्वार्टरों, स्टेशनों पर संचालित स्टॉलों और कार्यालयों में बिजली उपयोग की सटीक निगरानी की जाएगी। यह पहल बिजली उपयोग का पारदर्शी और कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
मुख्य बिंदु
- टाटानगर समेत दक्षिण पूर्व रेलवे जोन के सभी क्वार्टर, स्टॉल और कार्यालयों में स्मार्ट मीटर लगाना अनिवार्य।
- रेलवे बोर्ड के इलेक्ट्रिकल एवं इंजीनियरिंग विभाग ने आदेश जारी किया।
- इस अधिनियम के साथ बिजली खपत की निगरानी और बिलिंग में पारदर्शिता आएगी।
- झारखंड के बिजली विभाग पहले से ही बड़े पैमाने पर स्मार्ट मीटर लगा चुका है।
- स्मार्ट मीटर स्थापित करने के दिशा-निर्देश सभी रेलवे जोनों पर लागू।
पृष्ठभूमि
भारत सरकार ऊर्जा संरक्षण और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। स्मार्ट मीटर सिस्टम की शुरुआत से बिजली की चोरी, व्यर्थ खर्च और बिलिंग त्रुटियों में कमी आई है। झारखंड में बिजली विभाग पहले से ही इस तकनीक को अपनाकर बेहतर ऊर्जा प्रबंधन कर रहा है। इसी कड़ी में दक्षिण पूर्व रेलवे ने भी इस पहल को लागू करने का निर्णय लिया है ताकि रेलवे परिसरों में बिजली की खपत पर कड़ा नियंत्रण रखा जा सके।
नवीनतम अपडेट
रेलवे बोर्ड की निदेशक निशा मनोहर पाटिल ने आधिकारिक आदेश जारी कर सभी जोनल मुख्यालयों तथा प्रोडक्शन यूनिटों को स्मार्ट मीटर लगाने के निर्देश दिए हैं। दक्षिण पूर्व रेलवे ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और चरणबद्ध तरीके से इसे पूरा किया जाएगा।
स्मार्ट मीटर की स्थापना और निगरानी
क्वार्टरों और स्टेशन पर चलने वाले स्टॉलों में स्मार्ट मीटर का उपयोग बिजली के वास्तविक उपयोग को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाएगा। इससे ऊर्जा की बर्बादी घटेगी और बिजली बिलिंग में पारदर्शिता आएगी।
अधिकारी बयान
रेलवे अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बोर्ड के निर्देशों के अनुसार स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाएगी। यह कदम रेलवे परिसरों के ऊर्जा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएगा।
सार्वजनिक प्रभाव
यह निर्णय न केवल रेलवे के ऊर्जा खर्च को कम करेगा, बल्कि कर्मचारियों और व्यवसायिक इकाइयों को भी उनकी बिजली खपत पर बेहतर नियंत्रण प्रदान करेगा। बिजली की वास्तविक खपत के आधार पर बिलिंग से पारदर्शिता और विश्वास बढ़ेगा।
आगे क्या होगा?
स्मार्ट मीटर स्थापना के बाद दक्षिण पूर्व रेलवे अन्य जोनों के लिए भी इस मॉडल को आदर्श मानकर लागू कर सकता है। यह तकनीक ऊर्जा बचत और लागत घटाने में रेलवे को सहायता करेगी।
निष्कर्ष
दक्षिण पूर्व रेलवे में स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता से बिजली की खपत की सटीक मॉनीटरिंग संभव होगी, जिससे ऊर्जा प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार आएगा। यह पहल रेलवे की ऊर्जा कुशलता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- स्मार्ट मीटर क्या है? – यह एक इलेक्ट्रॉनिक मीटर है जो बिजली की खपत को वास्तविक समय में मापता है।
- दक्षिण पूर्व रेलवे में स्मार्ट मीटर क्यों जरूरी है? – बिजली खपत की पारदर्शिता और ऊर्जा प्रबंधन बेहतर बनाने के लिए।
- स्मार्ट मीटर से कर्मचारियों और स्टॉल संचालकों को क्या लाभ होगा? – यह बिलिंग में सही माप सुनिश्चित करता है, जिससे बिजली बिल में पारदर्शिता बढ़ती है।
- क्या यह कदम झारखंड के बाहर भी लागू होगा? – रेलवे बोर्ड के निर्देश अनुसार यह देश के सभी जोनों में लागू होगा।
- स्थापना की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी? – चरणबद्ध तरीके से जल्दी ही पूरी की जाएगी।



