सरयू राय ने चांडिल बांयी नहर की खराब हालत पर सरकार से मरम्मत की मांग की
JSRnews.com | Local | 13 Jul 2026
परिचय
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने चांडिल बांयी मुख्य नहर की जर्जर स्थिति को लेकर राज्य सरकार पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे किसानों के हितों के खिलाफ बताया है, खासकर तब जब सरकार उद्योगों से बड़ी रकम राजस्व के रूप में ले रही है।
मुख्य बिंदु
- चांडिल बांयी मुख्य नहर 30 वर्षों से बिना मरम्मत के चल रही है।
- नहर में झाड़ियां और गाद जमा हो जाने से सिंचाई संकट गहरा रहा है।
- सरकार को केवल टाटा स्टील से 700 करोड़ रुपये से अधिक की सालाना आय होती है।
- सरयू राय ने विशेष बजट की मांग की है ताकि नहर की पूरी मरम्मत हो सके।
- कमजोर मानसून के कारण किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है।
पृष्ठभूमि
चांडिल बांयी मुख्य नहर लगभग 128 किलोमीटर लंबी है, जिसकी स्थापना करीब 30 साल पहले हुई थी। इसका उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान करना था। लेकिन दरअसल नहर पिछले तीन दशकों में कभी भी पूरी तरह मरम्मत के दायरे में नहीं आई और उसकी देखभाल भी कमजोर रही।
सिंचाई संकट की जड़: चांडिल बांयी नहर की मरम्मत
सरयू राय ने जल संसाधन विभाग के सचिव को पत्र लिखकर बताया कि नहर की टूट-फूट, झाड़ियों की उपस्थिति, और गाद के जमाव ने किसानों की सिंचाई व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित किया है। यदि जल्द सुधार न हुआ तो आगामी खरीफ फसल प्रभावित हो सकती है।
नई जानकारी
सलाह दी जा रही है कि नहर की मरम्मत और सफाई के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में विशेष बजट रखा जाए। उद्योगों से करोड़ों रुपये ले कर भी सरकार के पास सिंचाई के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं लग रहे हैं। हाल ही में मौसम विभाग ने कमजोर मानसून की आशंका जताई है, जिससे किसानों की निर्भरता और बढ़ गई है।
आधिकारिक बयान
सरयू राय ने आरोप लगाया कि, ‘‘सरकार टाटा स्टील जैसे उद्योगों से भारी राजस्व प्राप्त कर रही है, परंतु सिंचाई की बुनियादी सुविधाओं में निवेश बेहद कम है।’’ उन्होंने कहा कि यह किसानों के प्रति अन्याय है, जिससे तत्काल कदम उठाना आवश्यक है।
प्रभाव जनता पर
स्थानीय किसानों को सिंचाई के अभाव में गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी फसलें प्रभावित हो रही हैं और आर्थिक नुकसान हो रहा है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक असर हो सकता है।
आगे क्या होगा
सरयू राय की मांग के बाद सरकार से नहर की मरम्मत शुरू कराने का दबाव बढ़ेगा। यदि वित्तीय वर्ष 2026-27 में विशेष बजट आता है तो स्थिति सुधर सकती है। किसान और उद्योग दोनों हितग्राही इस प्रक्रिया पर नजर रखते हैं।
निष्कर्ष
चांडिल बांयी मुख्य नहर की खराब हालत पर ध्यान न दिया जाना किसानों की मुश्किलों को बढ़ाता है। उद्योगों से भारी कमाई के बाबजूद अगर सिंचाई सुविधा नहीं सुधारी गई तो यह सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाता है।
प्रश्न और उत्तर
- चांडिल बांयी मुख्य नहर कितनी लंबी है? लगभग 128 किलोमीटर।
- सरयू राय ने किससे मरम्मत के लिए मांगा है विशेष बजट? वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए।
- सरकार को उद्योगों से कितना राजस्व होता है? प्रति वर्ष 700 करोड़ रुपये से अधिक टाटा स्टील से।
- कमजोर मानसून का सिंचाई पर क्या असर होगा? किसानों की निर्भरता नहर पर बढ़ेगी, जिससे संकट गहरा सकता है।
- सरयू राय ने सरकार पर क्या आरोप लगाए? किसानों की सिंचाई अनदेखी कर राजस्व का उपयोग न करना अन्याय बताया।



