पम्मी धर्मकांटा अतिक्रमण मामले में जियाडा की भूमिका पर सवाल, 1.5 महीने बाद भी कार्रवाई अधूरी
JSRnews.com | Local | 22 Jul 2026
परिचय
आदित्यपुर के पम्मी धर्मकांटा क्षेत्र में 30 मई को हुई एक दर्दनाक घटना ने प्रशासन की अभिकर्ता भूमिका पर गंभीर सवाल उठा दिए हैं। यहां हाईटेंशन बिजली तार की चपेट में आने से एक लॉजिस्टिक कंटेनर चालक की मौत हो गई थी, जिसके बाद जियाडा (JIADA) प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का वादा किया था। लेकिन डेढ़ महीने बीतने के बावजूद कोई समुचित कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय जनता में असंतोष बढ़ रहा है।
प्रमुख मुख्य बातें
- 30 मई को पम्मी धर्मकांटा के पास हाईटेंशन बिजली तार से हादसे में कंटेनर चालक की मौत।
- जियाडा की जांच में पाया गया कि आवंटित जमीन के अतिरिक्त सरकारी नाले पर अतिक्रमण हुआ।
- नाले पर अतिक्रमण से भारी वाहनों का हाईटेंशन लाइन के करीब आना संभव हुआ।
- जियाडा ने संचालक को 24 घंटे में अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम दिया।
- डेढ़ महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं, क्षेत्रीय उपनिदेशक के विरोधाभासी बयान पर सवाल।
- स्थानीय लोग पुनः जांच व उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि
पम्मी धर्मकांटा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित एक लॉजिस्टिक परिसर है, जिसे जियाडा द्वारा निर्धारित मानकों के तहत संचालित किया जाना चाहिए। 30 मई को इस परिसर के निकट अचानक उच्च वोल्टेज तार के संपर्क में आने से एक कंटेनर चालक की मृत्यु हो गई, जो सुरक्षा उपायों की कमी को उजागर करता है। जांच के दौरान जियाडा टीम ने पाया कि धर्मकांटा को आवंटित कुल 4,350 वर्ग फुट जमीन के साथ-साथ लगभग 2,000 वर्ग फुट सरकारी नाले की जमीन पर भी अवैध कब्जा किया गया है। इससे नाले की ऊंचाई बढ़ी और भारी वाहन उच्च वोल्टेज तार के अव्यवस्था के कारण दुर्घटना ग्रस्त हुए।
हालिया अपडेट
घटना के तुरंत बाद, जियाडा के क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश रंजन ने पम्मी धर्मकांटा संचालक रवि सरावगी को 24 घंटे में अतिक्रमण हटाने का करारा निर्देश दिया था। इसके साथ ही प्रवर्तन न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। हालांकि, लगभग डेढ़ माह बाद जांच में अधिकारियों द्वारा कहा गया कि अतिक्रमण अब नहीं पाया गया, जो स्थानीय जनता और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच संदेह और सवालों को जन्म देता है। घटनास्थल पर वाहनों की नियमित पार्किंग जारी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मामलें में प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया।
अधिकारी वक्तव्य
जियाडा के क्षेत्रीय उपनिदेशक दिनेश रंजन ने कहा, “पहली जांच के दौरान अतिक्रमण पाया गया था, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। हम लगातार निरीक्षण कर रहे हैं और यदि कोई भी नियम का उल्लंघन पाया जाता है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
जनता पर प्रभाव
स्थानीय लोग इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं क्योंकि अतिक्रमण से सुरक्षा के खतरे बढ़ गए हैं। दुर्घटना के बाद भी कार्रवाई न होना प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। लोग पुनः जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इसी तरह के हादसों को टाला जा सके।
आगे क्या होगा?
प्रशासन से उम्मीद है कि वे मामले की दोबारा जांच करेंगे और पारदर्शी कार्रवाई करेंगे। यदि सच में अतिक्रमण जारी है, तो नियमों के तहत तुरंत हटाने और भविष्य में सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करने के लिए कड़ा कदम उठाया जाना चाहिए। स्थानीय जनता की निगरानी और दबाव प्रशासन को जिम्मेदार बनाए रखने में सहायक होगा।
निष्कर्ष
पम्मी धर्मकांटा अतिक्रमण मामले में जियाडा की भूमिका की समीक्षा जरूरी हो गई है। एक ओर जहां सुरक्षा से जुड़ी गंभीर घटना हुई, वहीं प्रशासन की सुस्त कार्रवाई से यह मामला और अधिक विवादास्पद बन गया है। सभी पक्षों का यह दायित्व है कि वे जिम्मेदारी लेकर उचित कार्रवाई को पूर्णतया लागू करें ताकि पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- प्रश्न: पम्मी धर्मकांटा में हुआ हादसा कब हुआ था?
उत्तर: यह हादसा 30 मई को हुआ था। - प्रश्न: जियाडा ने क्या कार्रवाई का वादा किया था?
उत्तर: जियाडा ने अतिक्रमण हटाने का 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। - प्रश्न: अतिक्रमण के कारण क्या समस्या हुई?
उत्तर: नाले पर कब्जा होने से भूमि की ऊंचाई बढ़ गई और भारी वाहनों की हाईटेंशन लाइन के निकटता से दुर्घटना हुई। - प्रश्न: अब तक क्या कारगर कार्रवाई हुई है?
उत्तर: डेढ़ महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। - प्रश्न: स्थानीय लोग अब क्या मांग कर रहे हैं?
उत्तर: वे पुनः जांच और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।



