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एमजीएम अस्पताल एल्ट्रासाउंड सेवा में खामी से मरीजों में भारी नाराजगी

एमजीएम अस्पताल एल्ट्रासाउंड सेवा में खामी से मरीजों में भारी नाराजगी

JSRnews.com  |  Local  |  17 Jul 2026

परिचय:
जमशेदपुर के मानगो डिमना में स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सेवाएं सीमित संख्या में उपलब्ध होने के कारण मरीजों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे नाराजगी और असंतोष बढ़ रहा है।

मुख्य बिंदु

  • मरीजों को सुबह से अल्ट्रासाउंड जांच के लिए घंटों लाइन में खड़ा किया गया।
  • डॉक्टरों और तकनीकी कर्मचारियों की कमी से प्रतिदिन जांच की संख्या सीमित।
  • रात तक निर्धारित जांच संख्या पूरी होते ही नई जांच बंद।
  • आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर सबसे बड़ा प्रभाव।
  • मरीज और परिजन जांच क्षमता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि

एमजीएम अस्पताल राज्य का प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है जहां प्रतिदिन भारी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। हालांकि यहां इलेक्ट्रॉनिक और परंपरागत जांच सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड सेवा सीमित संख्या में मिलने से मरीजों को असुविधा होती है। खासकर गरीब वर्ग के लिए सरकारी अस्पतालों की यह सेवा महत्वपूर्ण होती है, जिसमें देरी उनकी स्वास्थ्य स्थिति को गंभीर बना सकती है।

ताज़ा जानकारी

गुरुवार को मरीजों ने सुबह से ही अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लाइन लगाई थी, परन्तु अस्पताल प्रबंधन ने लगभग 11 बजे मरीजों को वापस भेज दिया क्योंकि दिन का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका था। इसके बाद सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंचे और हालात को संभाला। मरीजों ने इस व्यवस्था को लेकर कड़ा विरोध जताया।

एमजीएम अस्पताल अल्ट्रासाउंड सेवा की स्थिति

जानकारी के अनुसार, एमजीएम में प्रतिदिन आउटपेशेंट विभाग (ओपीडी) के 30 और भर्ती मरीजों के लिए 20 अल्ट्रासाउंड जांच निर्धारित की जाती हैं। यह संख्या पार करने पर बाकी मरीजों की जांच अगले दिन के लिए टाल दी जाती है, जो न तो मरीजों के लिए सुविधाजनक है और न ही समय पर इलाज में मददगार।

आधिकारिक बयान

अस्पताल प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार, सीमित जांच उपकरण और विशेषज्ञ स्टाफ की कमी यह समस्या मुख्य वजह है। प्रबंधन ने जल्द ही अधिक मेडिकल स्टाफ और तकनीकी सहायता जुटाने का आश्वासन दिया है ताकि जांच में सुधार हो सके।

जनता पर असर

अस्पताल की अल्ट्रासाउंड जांच क्षमता कम होने से गरीब और निम्न आय वर्ग के मरीजों को विशेष रूप से कठिनाई होती है जो निजी जांच केंद्रों के महंगे शुल्क नहीं दे पाते। इससे उनके इलाज में बाधा आती है और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

आगे क्या होगा?

मरीजों और उनके परिजनों की बढ़ती मांगों के बीच अस्पताल प्रबंधन जल्द सुधार की दिशा में कदम उठा सकता है। आवाज उठाने वाले सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य अधिकारियों से भी इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है।

निष्कर्ष

एमजीएम अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा की वर्तमान स्थिति सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को उजागर करती है। जरूरी है कि समय रहते संसाधन बढ़ाये जाएं ताकि मरीजों को सुविधा मिल सके और अस्पताल की विश्वसनीयता बनी रहे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  • एमजीएम अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की कितनी क्षमता है?
    प्रतिदिन लगभग 50 मरीजों की अल्ट्रासाउंड जांच होती है।
  • क्या मरीज बिना जांच के लौट जाते हैं?
    हाँ, जब निर्धारित संख्या पूरी हो जाती है तो बाकी मरीजों को अगली दिन जांच की सलाह दी जाती है।
  • क्या निजी जांच केंद्र विकल्प हैं?
    हाँ, किन्तु निजी केंद्रों में शुल्क अधिक होता है।
  • अस्पताल ने समस्या समाधान के लिए क्या कदम उठाए हैं?
    अधिक डॉक्टर और तकनीकी कर्मी जुटाने का प्रयास चल रहा है।
  • मरीजों की शिकायत कब तक दूर होगी?
    अस्पताल के संसाधन बढ़ने के बाद ही सुविधा में सुधार संभव होगा।
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Author
JSRNews ब्यूरो
JSRNews ब्यूरो JSRnews.com की टीम के सदस्य हैं। जमशेदपुर और झारखंड की ताज़ा खबरें, स्थानीय मुद्दे और विकास की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञ।
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