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एमजीएम अस्पताल इमरजेंसी में बेड की कमी, मरीजों को जमीन पर इलाज करना पड़ रहा मजबूर

एमजीएम अस्पताल इमरजेंसी में बेड की कमी, मरीजों को जमीन पर इलाज करना पड़ रहा मजबूर

JSRnews.com  |  Local  |  21 Jul 2026

परिचय
जमशेदपुर के डिमना स्थित एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में बेड की कमी एवं अन्य संसाधनों की तंगी से मरीज गंभीर हालात में इलाज कराने को मजबूर हैं। वायरल बुखार, मलेरिया जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि के कारण इमरजेंसी वार्ड दबाव में है।

मुख्य बातें

  • एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी वार्ड में बेड, स्ट्रेचर और कुर्सियों की भारी कमी।
  • मरीजों को इलाज के लिए जमीन पर भी लिटाना पड़ रहा है।
  • 18 नए स्ट्रेचर-बेड मंगाए गए, पर उनका उपयोग अभी शुरू नहीं हो पाया।
  • कई मरीजों को इमरजेंसी में घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

पृष्ठभूमि

एमजीएम अस्पताल मशहूर और बड़ा स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद, अचानक बीमारियों की बढ़ती झुंझलाती संख्या के कारण अस्पताल का इमरजेंसी विभाग अत्यधिक दबाव में आ गया है। वायरल फीवर, मलेरिया, किडनी, हृदय जैसी बीमारियों से ग्रस्त मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे अस्पताल की संसाधन क्षमता सीमित हो गई है।

इमरजेंसी में बढ़ती चुनौती

वर्तमान में अस्पताल में स्ट्रेचर-बेड, बेंच, कुर्सियां पूरी तरह भरी हुई हैं। मरीजों को कई बार जमीन पर लेटकर इलाज करवाना पड़ रहा है, जो स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों को और जटिल बना रहा है।

ताजा जानकारी

अस्पताल प्रबंधन द्वारा 18 नए स्ट्रेचर-बेड मंगाए गए, लेकिन सोमवार देर रात तक उनका उपयोग इमरजेंसी वार्ड में शुरू नहीं हो सका। ये नए स्ट्रेचर रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास हॉल में रखे गए हैं, जबकि इमरजेंसी वार्ड में जगह की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता बनी हुई है।

विशेष मरीजों की कहानी

धालभूमगढ़ प्रखंड के चौईरा गांव की 73 वर्षीय मकरी हेंब्रम को किडनी, हृदय और गैस से जुड़ी बीमारियों के साथ सांस लेने में तकलीफ के बीच, सप्ताहांत में जमीन पर रक्त चढ़ाना पड़ा। उन्हें 18 मई को अस्पताल में बेड मिला। इसी तरह, सांप काटने के बाद घाटशिला से रेफर किए गए असित मानकी और पैरालिसिस से पीड़ित पूजा सिंह को भी बेड का इंतजार करना पड़ा।

अधिकृत बयान

एमजीएम अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि बढ़ती मांग के मुकाबले संसाधनों में समयानुसार विस्तार किया जा रहा है। नए स्ट्रेचर-बेड जल्द इमरजेंसी वार्ड को आवंटित कर दिये जाएंगे ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके।

स्वास्थ्यकर्मियों का प्रयास

डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी लगातार मरीजों की सेवा में लगे हुए हैं, वे सभी संभव प्रयास कर रहे हैं कि इलाज प्रभावित न हो, हालांकि संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

जनता पर प्रभाव

मरीजों और उनके परिवार वालों में अस्पताल व्यवस्था को लेकर चिंता बनी हुई है। वे चाहते हैं कि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन हो ताकि समय पर सभी को बेड और जरूरी सुविधाएं मिल सकें। जमीन पर इलाज मजबूरी और लंबे इंतजार से उनका स्वास्थ्य और मानसिक तनाव बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

अस्पताल प्रशासन द्वारा हालत सुधार के प्रयास जारी हैं। उम्मीद है जल्द ही नए संसाधनों का बेहतर उपयोग शुरू हो जाएगा। साथ ही सरकार और स्वास्थ्य विभाग को भी अस्पताल की आपातकालीन सेवा के लिए संसाधनों में बढ़ोतरी की सख्त आवश्यकता है।

निष्कर्ष

एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में बेड की कमी और संसाधन संबंधी समस्याएं स्थानीय जनता के लिए चिंता का विषय हैं। समय पर इलाज और सुविधा प्रदान करना स्वास्थ्य सेवा का मूल उद्देश्य है, जिसके लिए अभी सुधार आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • एमजीएम अस्पताल की इमरजेंसी में बेड की कमी क्यों है?
    मरीजों की संख्या अचानक बढ़ गई है और संसाधनों की उपलब्धता उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ाई गई।
  • क्या नए स्ट्रेचर-बेड का उपयोग कब होगा?
    अस्पताल प्रबंधन ने बताया है कि जल्द ही नए स्ट्रेचर-बेड इमरजेंसी वार्ड को आवंटित कर दिये जाएंगे।
  • मरीजों को जमीन पर इलाज क्यों करना पड़ रहा है?
    जब वार्ड में बेड और स्ट्रेचर पूरी तरह भर जाते हैं, तब मरीजों को मिल रही जगह की कमी के कारण यह मजबूरी होती है।
  • क्या अस्पताल प्रशासन इस समस्या को हल करने के लिए कदम उठा रहा है?
    हाँ, अस्पताल नए संसाधन जोड़ने और बेहतर प्रबंधन के लिए सक्रिय है।
  • क्या स्वास्थ्य विभाग ने इस स्थिति पर ध्यान दिया है?
    स्वास्थ्य विभाग से भी अधिकारियों का जुड़ाव है, और आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।
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JSRNews ब्यूरो
JSRNews ब्यूरो JSRnews.com की टीम के सदस्य हैं। जमशेदपुर और झारखंड की ताज़ा खबरें, स्थानीय मुद्दे और विकास की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञ।
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