कर्नाटक कांग्रेस में सत्तांतरण की गति तेज, राहुल गांधी के दबाव में सिद्दारमैया ने इस्तीफा दिया
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री बदलने की प्रक्रिया में तेजी आ गई है। लंबे समय से चल रहे इस विवाद का अंत दिल्ली के कांग्रेस हाईकमांड की लगातार बैठक के बाद हुआ है, जहां मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस्तीफा देने के लिए सहमति व्यक्त की। यह निर्णय कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दवाब और सत्ता साझेदारी के पुराने वादे को निभाने के आग्रह के बाद लिया गया।
JSRnews.com | Politics | 28 May 2026
सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने शुरू में सिद्दारमैया से दो हफ्ते का समय मांगा था ताकि जातीय जनगणना रिपोर्ट को कैबिनेट में पेश किया जा सके, लेकिन हाईकमांड तत्काल नेतृत्व परिवर्तन पर जोर दे रही थी। राहुल गांधी ने सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार दोनों के साथ कई बैठकें कीं, जिसमें पार्टी की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सत्ता परिवर्तन आवश्यक बताया गया।
राहुल गांधी के दबाव में सिद्दारमैया का इस्तीफा
राहुल गांधी ने साफ कर दिया कि 2023 में हुए सत्ता साझेदारी समझौते का सम्मान करना अनिवार्य है, जिसके तहत मुख्यमंत्री पद को दो चरणों में बांटा जाना था। सिद्दारमैया ने पहले बताया था कि उनके पास 2025 तक पद पर रहने का कोई औपचारिक लिखित समझौता नहीं है, लेकिन इस बार उन्होंने स्पष्ट किया कि जब राहुल गांधी कहेंगे, तब वह हट जाएंगे। हाईकमान के वरिष्ठ नेताओं केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला ने भी सिद्दारमैया को इस फैसले का सम्मान करने की सलाह दी।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन से कांग्रेस को मिलेगा सशक्त संगठन
कांग्रेस नेतृत्व इस बदलाव को संगठनात्मक अनुशासन कायम रखने के लिए बेहद जरूरी मान रहा है। कई राज्यों में सत्ता साझेदारी वादों के बावजूद बदलाव नहीं हो पाया था, जिससे पार्टी में गुटबाजी और विवाद बढ़े। कर्नाटक का सख्त रुख दूसरे राज्यों की कांग्रेस इकाइयों को भी स्पष्ट संदेश देने वाला है कि अब हाईकमान के फैसले को चुनौती देना आसान नहीं होगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से झारखंड समेत अन्य राज्यों के कांग्रेस संगठन में भी स्थिरता आएगी और चुनावों की तैयारियों में मदद मिलेगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि नेतृत्व परिवर्तन कब तक पूरा होगा और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री पद मिलने की प्रतिक्षा कब खत्म होगी।


