झींकपानी में 80 साल पुरानी एसीसी फैक्ट्री हुई बंद, कोल्हान की औद्योगिक पहचान संकट में
चाईबासा के झींकपानी में स्थित 80 वर्षों पुराना एसीसी सीमेंट प्लांट, जिसे वर्तमान में अडानी एसीसी के नाम से जाना जाता है, पूरी तरह से बंद हो गया है। यह खबर जैसे ही सामने आई, तो पूरे क्षेत्र में मायूसी का माहौल फैल गया। 1946 में स्थापित इस प्लांट ने दशकों तक कोल्हान क्षेत्र की औद्योगिक पहचान को मजबूती दी थी, लेकिन अब वह इतिहास बन गया है।
JSRnews.com | Local | 28 May 2026
एक समय इस प्लांट में करीब 2000 से अधिक स्थायी कर्मचारी और 25 से 30 हजार लोग परोक्ष रूप से रोजगार पा रहे थे। झारखंड के गठन के बाद स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। कंपनी ने कर्मचारियों को वीआरएस देना शुरू किया और मजदूरों की संख्या घटती गई। पिछले कुछ वर्षों में सिर्फ 100 स्थायी और 800 ठेका मजदूर ही कार्यरत थे। अब झींकपानी की सड़कें सुनसान हैं और कंपनी कॉलोनी के घर धीरे-धीरे खंडहर बन गए हैं।
2003 में राज्य सरकार ने इस कंपनी को पुनर्जीवित करने के लिए 384 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी थी, लेकिन यह मदद भी उत्पादन या कार्य प्रणाली में सुधार नहीं कर सकी। वहीं, कंपनी पर अवैध माइनिंग के लगभग 900 करोड़ रुपये के आरोप लगे, जो खदान और प्लांट दोनों के संचालन में बाधक बने। 2020-21 तक लीज प्रक्रिया और खनन विवाद के कारण स्थिति और खराब होती गई। बाद में अडानी ग्रुप ने कंपनी का नियंत्रण संभाला, पर उत्पादन सामान्य नहीं हो पाया।
ग्रामीणों, रैयतों, प्रशासन और कंपनी के बीच कई बार बातचीत हुई, लेकिन विवाद जारी रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी ने उनका विश्वास नहीं जीता और राजनीतिक उदासीनता ने भी इस क्षेत्र की मूल औद्योगिक पहचान खत्म कर दी।
कंपनी बंदी के बाद क्षेत्र में राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है। 29 मई को प्रस्तावित पदयात्रा को परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ की पहल पर स्थगित किया गया। 31 मई को झींकपानी में मंत्री, सांसद, विधायक, कंपनी प्रतिनिधि और ग्रामीण मिलकर एक निर्णायक बैठक कर प्लांट को बंद होने से बचाने पर चर्चा करेंगे। इस संदर्भ में 'एसीसी बचाओ संघर्ष समिति' का गठन भी किया गया है। मजदूर नेता जॉन मिरानमुंडा ने कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए कृषि, उद्योग और व्यापार सभी जरूरी हैं और वर्तमान संकट के लिए कंपनी प्रबंधन और सरकार दोनों जिम्मेदार हैं।


