झारखंड में सांप के कांटने के मामले 10 गुना बढ़े, घोषित किया नोटिफायबल रोग
झारखंड के सांप के काटने के मामले चौंकाने वाले स्तर पर बढ़े हैं। राज्य स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, केवल पिछले चार वर्षों में सांप के काटने के मामले दस गुना से भी अधिक बढ़े हैं, जिसके कारण 2022 से अब तक कुल 9,438 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस नाटकीय वृद्धि के बाद राज्य सरकार ने सांप के काटने को "नोटिफायबल रोग" घोषित कर दिया है ताकि सभी स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लें।
JSRnews.com | Local | 28 May 2026
सांप के काटने के मामले: चार वर्ष का विश्लेषण
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, सांप के काटने की घटनाएं वर्ष दर वर्ष तेजी से बढ़ी हैं। 2022 में मात्र 392 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या 4,078 तक पहुंच चुकी है। इस अवधि में मौतों की भी संख्या बढ़ी, जो सांप के जहर से होने वाली स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है।
| वर्ष | रिपोर्ट किए गए मामले | मृत्युदर |
|---|---|---|
| 2022 | 392 | जानकारी उपलब्ध नहीं |
| 2023 | 1,647 | 15 |
| 2024 | 2,760 | 22 |
| 2025 | 4,078 | 26 |
| 2026 (अप्रैल तक) | 561 | लेना जारी है |
मूल कारण और सावधानियां
झारखंड में 250 से अधिक सांप की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से केवल 25 प्रतिशत ही विषैले हैं जैसे आम क्रेट, भारतीय कोबरा और रसेल्स वाइपर। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश मौतें विष के कारण नहीं, बल्कि पैनिक अटैक और भय से होती हैं। ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर पारंपरिक तरीके अपनाते हैं जैसे सांप के छेड़ने वाले और जड़ी-बूटी वाले उपाय, जो विषाक्तता को खत्म करने में मदद नहीं करते।
सांप के काटने पर क्या करें?
- शांत रहें: घबराहट से स्थिति और बिगड़ सकती है, अपनी दिल की धड़कन को नियंत्रित रखें।
- रक्त प्रवाह को धीमा करें: जख्म के ऊपर हल्का पट्टू बांधें लेकिन ऐसे कि रक्त संचार पूरी तरह बंद न हो।
- समय नोट करें: तुरंत 60 मिनट के अंदर निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचें।
- किसी जादू-टोने से बचें: आस्था आधारित उपचार जहर को खत्म नहीं करते, केवल एंटी-वेनम ही प्रभावी है।
सांप के काटने को "नोटिफायबल रोग" घोषित कर के स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इस समस्या पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया है ताकि समय पर सटीक उपचार मिल सके और जानमाल की हानी रोकी जा सके। यह कदम झारखंड के ग्रामीण समुदाय में जागरूकता फैलाने और आपातकालीन स्थिति में तत्परता बढ़ाने में सहायक होगा।


