झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ का प्रदर्शन, उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मांगी मांगों पर त्वरित कार्रवाई
JSRnews.com | Local | 08 Jul 2026
परिचय
झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ ने अपनी कई वर्षों से लंबित मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय जमशेदपुर के सामने प्रदर्शन किया। पंचायत सचिवों ने राज्य सरकार पर उनकी मांगी गई मांगों को लगातार नजरअंदाज करने का आरोप लगाया और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से एक ज्ञापन सौंपा।
प्रमुख बिंदु
- 2019 से पंचायत सचिवों के वेतन और सेवा संबंधी मुद्दे पलटने का इंतजार।
- पंचायत सचिवों के पद पुनर्गठन और ग्रेड पे वृद्धि की मांग।
- प्रोन्नति, संसाधन उपलब्धता और कार्यभार से छूट भी शामिल मांगों में।
- यदि सरकार कार्यवाही नहीं करती, तो आंदोलन को तेज करने की चेतावनी।
पृष्ठभूमि
झारखंड के ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था में पंचायत सचिवों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। 2019 के राज्य सम्मेलन में समाहरणालय कर्मियों के अनुरूप पंचायत सचिवों का ग्रेड पे बढ़ाकर 2400 रुपये करने की मांग उठाई गई थी, जो अब भी अनसुनी है। कई वर्षों से उनकी सेवा संबंधी मांगें अधूरी पड़ी हैं, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है।
ताजा अपडेट
संघ ने मांग की है कि पंचायत सचिवों के पदों का पुनर्गठन करते हुए कनीय, उच्च वर्गीय, वरिष्ठ, प्रधान और अधीक्षक पंचायत सचिव के पद बनाए जाएं। प्रत्येक पद पर क्रमशः 2400, 2800, 4200, 4600 और 4800 रुपये ग्रेड पे निर्धारित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, 50% पदों पर प्रोन्नति, प्रत्येक पंचायत सचिवालय में कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुसेवक और रात्रि प्रहरी की नियुक्ति की भी मांग की गई है। उन्होंने मनरेगा कार्य से मुक्त किए जाने और पंचायत सचिवों से रोजगार सेवक के काम हटाने का भी आग्रह किया।
अधिकारिक बयान
संघ के पदाधिकारी ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन को और तीव्र करेंगे। उन्होंने कहा कि पंचायत सचिवों का काम प्राथमिक ग्रामीण विकास से जुड़ा है और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार का ध्यान जरूरी है।
जनता पर प्रभाव
पंचायत सचिवों की मांगों का स्थायी समाधान न होना ग्रामीण प्रशासन और विकास कार्यक्रमों को प्रभावित कर सकता है। इससे पंचायत स्तर पर कामकाज बाधित हो सकता है जिससे ग्रामवासी अनदेखा महसूस कर सकते हैं।
आगे क्या होगा?
अब यह देखना होगा कि सरकार जल्द से जल्द पंचायत सचिव संघ की मांगों पर क्या निर्णय लेती है। यदि मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो संघ के आंदोलन की गति बढ़ सकती है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर दबाव बढ़ेगा।
निष्कर्ष
झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ का यह प्रदर्शन लंबे समय से अनसुनी मांगों के प्रति सरकार को सावधान करता है। समय रहते उचित सुधार व निवेश से पंचायत सचिवों का मनोबल बढ़ाकर ग्रामीण विकास को सफल बनाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- प्रश्न: पंचायत सचिव संघ की सबसे बड़ी मांग क्या है?
उत्तर: उनकी प्रमुख मांग ग्रेड पे वृद्धि और पद पुनर्गठन की है। - प्रश्न: यह आंदोलन कब शुरू हुआ?
उत्तर: पंचायत सचिवों की कई मांगें 2019 से लंबित हैं, हाल ही में उन्होंने उपायुक्त कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। - प्रश्न: क्या सरकार ने इस ज्ञापन पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
उत्तर: अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। - प्रश्न: पंचायत सचिवों की समस्याओं का प्रभाव जनता पर क्या होता है?
उत्तर: इनसे ग्रामीण विकास योजनाओं की गति प्रभावित होती है। - प्रश्न: आगे का कदम क्या होगा?
उत्तर: यदि मांगों पर जल्दी कार्रवाई नहीं हुई, तो संघ आंदोलन तेज कर सकता है।



