झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा 2024 में विवाद, JSSU ने दोबारा परीक्षा कराने की मांग की
JSRnews.com | Local | 26 Jul 2026
परिचय
झारखंड संताल स्टूडेंट्स यूनियन (JSSU) ने हाल ही में झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा 2024 के संबंध में गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन का कहना है कि परीक्षा के संताली भाषा के प्रश्नपत्र में निर्धारित सिलेबस से हटकर प्रश्न पूछे गए जिससे अभ्यर्थियों को असमानता का सामना करना पड़ा।
मुख्य बातें
- JSSU ने पोटका विधायक संजीव सरदार को ज्ञापन सौंपकर दोबारा परीक्षा कराने की मांग की।
- संथाली भाषा के प्रश्नपत्र में 40 से अधिक प्रश्न सिलेबस से बाहर थे।
- छात्रों ने बताया कि इससे उनकी चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई।
- विशेषज्ञ समिति गठन कर प्रश्नपत्र की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
परीक्षा विवाद का पृष्ठभूमि
झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा 2024 में संताली भाषा के प्रश्नपत्र को लेकर छात्रों में असंतोष सामने आया है। JSSU का आरोप है कि प्रश्नपत्र-2 में 100 प्रश्नों में से लगभग 40 प्रश्न जेसीजीएल, पीजीटी, यूजीसी नेट, यूपीएससी और जेपीएससी स्तर के थे जो सिलेबस से मेल नहीं खाते। इसके अतिरिक्त कुछ प्रश्न पहले ही गलत घोषित हो चुके हैं। इस स्थिति ने क्षेत्रीय भाषा के उम्मीदवारों को असमान परीक्षा व्यवस्था के तहत बनाए रखा।
ताजा स्थिति
JSSU ने इस मामले पर पोटका विधायक संजीव सरदार को ज्ञापन देकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच और विशेषज्ञों की समिति गठित कर परीक्षा को पुनः आयोजित कराने की मांग की है। इसे छात्रों का न्याय सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी त्रुटियों से बचने के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
आधिकारिक बयान
विधायक संजीव सरदार ने कहा कि वे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ जल्द ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात करेंगे जहां छात्र सीधे अपनी समस्याएं और मांगे रखेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों की बात सरकार तक पहुंचाना और निष्पक्ष समाधान निकालना है।
इसका जनजीवन पर प्रभाव
इस विवाद ने झारखंड के क्षेत्रीय भाषा से जुड़े हजारों छात्रों में चिंता और असंतोष बढ़ाया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना उचित जांच के चयन प्रक्रिया प्रभावित होने से उनकी करियर संभावनाएं खतरे में पड़ सकती हैं। यह मांग न्याय और पारदर्शिता के लिए है जो शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बनाए रखे।
आगे क्या होगा?
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मामले की सटीक रूपरेखा सामने आएगी। विशेषज्ञ समिति गठन से परीक्षा प्रणाली में सुधार और त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने का प्रयास होगा। छात्रों को उम्मीद है कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई होगी और उनकी परीक्षा प्रक्रिया प्रमाणिक होगी।
निष्कर्ष
झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता परीक्षा 2024 में सामने आए विवाद को लेकर JSSU की मांगें न्याय संगत प्रतीत होती हैं। क्षेत्रीय भाषा के संरक्षण और अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए निष्पक्ष जांच, पुनरावलोकन और सुधार आवश्यक है। इससे परीक्षा की साख बढ़ेगी और छात्रों में विश्वास पैदा होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- JSSU ने परीक्षा के किस पहलू पर सवाल उठाए?
JSSU ने संताली भाषा के प्रश्नपत्र में सिलेबस से बाहर के प्रश्न पूछे जाने का आरोप लगाया है। - क्या परीक्षा दोबारा होने की संभावना है?
छात्रों की मांग के मुताबिक विशेषज्ञ समिति की जांच के बाद दोबारा परीक्षा कराने की संभावना है। - विधायक संजीव सरदार की भूमिका क्या है?
विधायक छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाएंगे। - यह विवाद छात्रों को कैसे प्रभावित करता है?
असमान प्रश्नपत्र के कारण छात्रों की चयन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिससे उनका भविष्य दांव पर है। - इस स्थिति में सरकार का क्या रुख है?
सरकार मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन पहले ही देने को तैयार है और जल्द समाधान के प्रयास कर रही है।



