झारखंड में कॉर्निया ट्रांसप्लांट को नई मंजूरी, 3 अस्पताल अब सेवा देंगे
JSRnews.com | Local | 24 Jun 2026
परिचय
झारखंड में नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य सरकार ने कॉर्निया ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में तीन प्रमुख अस्पतालों को पांच वर्षों के लिए अनुमति दी है, जो स्थानीय मरीजों के लिए राहत का कारण बनेगा।
प्रमुख बिंदु
- टाटा मेन हॉस्पिटल, जमशेदपुर और आईरिस सुपर स्पेशियलिटी आई केयर सेंटर, रांची को कॉर्निया ट्रांसप्लांट की मंजूरी मिली।
- एमजीएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, जमशेदपुर को कॉर्निया ट्रांसप्लांट और आई बैंक संचालित करने की अनुमति मिली।
- लोकनायक जयप्रकाश नारायण आई हॉस्पिटल और कोडरमा रोटरी चैरिटेबल ट्रस्ट को मानकों के अभाव में अनुमति नहीं मिली।
- स्वास्थ्य विभाग बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने गुणवत्ता और पारदर्शिता पर जोर दिया।
पृष्ठभूमि
कॉर्निया ट्रांसप्लांट एक जीवनदायिनी नेत्र चिकित्सा प्रक्रिया है, जो दृष्टिहीनता को सुधारने में मदद करती है। झारखंड में इस सेवा का विस्तार लंबे समय से अपेक्षित था क्योंकि स्थानीय मरीजों को इसके लिए बाहर के शहरों तक जाना पड़ता था।
कॉर्निया ट्रांसप्लांट सेवाओं की समीक्षा और मंजूरी
हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी कमेटी ने ट्रांसप्लांटेशन ऑफ ह्यूमन ऑर्गन्स (संशोधन) अधिनियम, 2011 के तहत तकनीकी और कानूनी मानकों के अनुसार विभिन्न अस्पतालों के निरीक्षण के बाद यह निर्णय लिया।
ताजा अपडेट
झारखंड की एडवाइजरी कमेटी ने तीन अस्पतालों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट और आई बैंक संचालन की मंजूरी दी है। पांच अस्पतालों के निरीक्षण में आवश्यक संसाधनों और उपकरणों की उपलब्धता का विश्लेषण किया गया। जगह-जगह से मांग के कारण जमशेदपुर में आई बैंक स्थापित करने की पहल तेज हुई।
आधिकारिक बयान
अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा, "राज्य में प्रत्यारोपण सेवाओं का विस्तार पूरी गुणवत्ता और कानूनी प्रावधानों के अनुसार होगा ताकि मरीजों को बेहतर और समय पर इलाज मिले।" निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे।
जनता पर प्रभाव
अब जमशेदपुर और रांची के मरीजों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए दूर-दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे इलाज में समय और खर्च दोनों की बचत होगी। स्थानीय अस्पतालों में बेहतर उपकरण और विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होने से मरीजों का जीवन स्तर सुधरेगा।
आगे क्या होगा?
मंजूरी मिलने के बाद संबंधित अस्पतालों में उपकरणों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। चिकित्सा टीमों को प्रशिक्षित कर सेवा की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि झारखंड के सभी क्षेत्रीय मरीजों को बेहतर नेत्र चिकित्सा सेवाएं मिल सकें।
निष्कर्ष
कॉर्निया ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में यह फैसला झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक सराहनीय कदम है। स्थानीय मरीजों को राहत मिलेगी और राज्य की नेत्र चिकित्सा सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- कॉर्निया ट्रांसप्लांट क्या है?
यह एक शल्य चिकित्सा प्रक्रिया है जिसमें क्षतिग्रस्त कॉर्निया को स्वस्थ कॉर्निया से बदल दिया जाता है। - झारखंड में किन अस्पतालों को अनुमति मिली है?
टाटा मेन हॉस्पिटल, आईरिस सुपर स्पेशियलिटी आई केयर सेंटर और एमजीएम मेडिकल कॉलेज, जमशेदपुर। - आई बैंक क्या है?
आई बैंक एक ऐसी सेवा है जहां मृत दाताओं से प्राप्त कॉर्निया को संग्रहित किया जाता है और जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है। - क्या अब मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा?
हाँ, झारखंड में अब बेहतर सुविधाओं के कारण बाहर जाने की आवश्यक्ता कम हो जाएगी। - अगले पांच सालों में क्या बदलाव होंगे?
राज्य में कॉर्निया ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़ेगी और गुणवत्ता नियंत्रित रहेगी।



