जापान ने 20 साल बाद भारत के आमों पर लगाई रोक, निर्यातकों ने मौनापॉली पर सवाल उठाए
जापान ने भारत के आमों के निर्यात पर 20 साल बाद रोक लगा दी है, जो भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। यह फैसला खास तौर पर ऐसे समय में आया है जब भारत विदेशी बाजारों में अपनी कृषि उत्पादकता बढ़ाने की प्रयास कर रहा है। जापान के इस निर्णय ने आम निर्यात में लगे भारतीय उद्योग और किसानों के बीच भारी असंतोष पैदा कर दिया है।
JSRnews.com | Business | 28 May 2026
निर्यातकों का कहना है कि जापान द्वारा लगाए गए इस प्रतिबंध के पीछे एकाधिकार और बाजार नियंत्रण की राजनीति हो सकती है, जो भारतीय आम निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही है। यह रोक भारत की विदेशी मुद्रा कमाई को भी नुकसान पहुंचा सकती है क्योंकि जापान भारतीय आमों का एक बड़ा ग्राहक रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रतिबंध भारतीय आमों की गुणवत्ता या स्वास्थ्य सुरक्षा का मसला नहीं बल्कि व्यापारिक हितों से जुड़ा मामला हो सकता है। भारतीय mango exporters ने सरकार से इस स्थिति पर हस्तक्षेप कर जापान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाने की मांग की है ताकि बाजार में भारतीय आमों की पहुंच बनी रहे।
भारतीय आम, खासकर अल्फांसो और दशहरी, जापान समेत विश्व के कई देशों में अपनी अनोखी मिठास और गुणवत्ता के लिए प्रसिद्ध हैं। पिछले दो दशकों में भारत से जापान के आमों के निर्यात में लगातार वृद्धि हो रही थी, जिससे किसानों की आय में अच्छा खासा इज़ाफा हुआ था।
अब जापान का यह कदम कई बार बिजली की तरह गिरा है और भारतीय कृषि निर्यात नीति के लिए नई चुनौतियां प्रस्तुत करता है। भारत को अपने निर्यात प्रतिस्पर्धियों जैसे थाईलैंड और फिलीपींस से मुकाबला करने के लिए रणनीति में सुधार करना होगा ताकि जापान जैसे प्रमुख बाजार में अपनी स्थिति मजबूत रख सके।
सरकार और व्यापारिक संगठन इस मुद्दे को लेकर गंभीरता से आगे बढ़ रहे हैं, और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले का समाधान निकल आएगा जिससे भारत के आम फिर से जापान की दुकानों पर वापस आ सकेंगे।
