जमशेदपुर धोखाधड़ी मामले में आरोपियों की दूसरी बार अग्रिम जमानत खारिज
JSRnews.com | Crime | 24 Jun 2026
परिचय
जमशेदपुर में एक गंभीर धोखाधड़ी मामले ने फिर से कोर्ट की सुनवाई में नया मोड़ लिया है। लगभग एक करोड़ रुपये की कथित आर्थिक धोखाधड़ी के आरोप में फंसे सचिदानंद प्रसाद और सुरेश प्रसाद की अग्रिम जमानत याचिका दूसरी बार अदालत ने खारिज कर दी है। इस फैसले ने आरोपियों के लिए राहत की उम्मीद को एक बार फिर धक्का दिया है।
मुख्य बातें
- सचिदानंद प्रसाद और सुरेश प्रसाद की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका खारिज
- मामला स्पंद हॉस्पिटल (पिछले नाम: एलीट हॉस्पिटल) से जुड़ा
- उलीडीह थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 420, 406 और 120 बी के तहत चार्जशीट दाखिल की
- अदालत ने मामले की गंभीरता और जांच में मिले तथ्य को ध्यान में रखकर फैसला किया
पृष्ठभूमि
यह मामला मानगो स्थित एनएच डिमना-पारडीह रोड पर संचालित चिकित्सा संस्थान एलीट हॉस्पिटल से जुड़ा है, जिसे अब स्पंद हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता है। आरोप है कि अस्पताल के पूर्व निदेशक सचिदानंद प्रसाद और सुरेश प्रसाद ने शहर के जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष कुमार गुप्ता के साथ मिलकर लगभग एक करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।
जांच एवं कानूनी प्रक्रिया
उलीडीह थाना पुलिस ने मामले में गहन जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की महत्वपूर्ण धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक न्यास भंग) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेज और साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए गए। इस अत्यंत गंभीर मामले में दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद ही न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा।
नवीनतम अपडेट
22 जून 2026 को दोनों पक्षों की बहस समाप्त होने के बाद अदालत ने 24 जून को अपना आदेश जारी किया। इस आदेश में न्यायालय ने आरोपियों की दूसरी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जिससे अभियुक्तों को बड़ा झटका लगा।
अधिवक्ताओं के तर्क
अभियोजन की ओर से अधिवक्ता राजीव कुमार सिन्हा और श्वेता सिन्हा ने मजबूत प्रमाणों के साथ अदालत के समक्ष मामला प्रस्तुत किया। वहीं, आरोपियों के वकील के.एम. सिंह ने जमानत दिलाने की कोशिश की, पर अदालत ने राज्य की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों को अधिक अहमियत दी।
आधिकारिक बयान
न्यायालय सूत्रों के अनुसार, मामले की गंभीरता, आरोपों की प्रकृति और जांच में प्राप्त साक्ष्यों को देखते हुए, न्यायालय ने इस सीरत में अग्रिम जमानत न देने का निर्णय किया है ताकि न्यायिक प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रूप से संचालित हो सके।
जनता पर असर
यह मामला शहर की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान से जुड़ा होने के कारण स्थानीय जनता के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं मिलने से उम्मीद जताई जा रही है कि जांच और कोर्ट प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी होगी।
आगे क्या होता है?
अब मामले की सुनवाई अदालत में आगे बढ़ेगी। आरोपी न्यायालय के अगले आदेशों तक जेल में रहेंगे। आरोप और साक्ष्य की समीक्षा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। इससे यह स्पष्ट है कि यह मामला अभी लंबी कानूनी लड़ाई का विषय बना रहेगा।
निष्कर्ष
जमशेदपुर धोखाधड़ी मामले में सचिदानंद प्रसाद और सुरेश प्रसाद की दूसरी अग्रिम जमानत खारिज होना एक महत्वपूर्ण विकास है। यह अदालत द्वारा गंभीर जांच और तथ्य आधारित निर्णय की पुष्टि करता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि न्यायालय इस प्रकार के आर्थिक अपराधों को गंभीरता से लेता है।
साझा सवाल-जवाब (FAQ)
- प्रश्न: मामला किस हॉस्पिटल से जुड़ा है?
उत्तर: मामला स्पंद हॉस्पिटल (पूर्व में एलीट हॉस्पिटल) से जुड़ा है। - प्रश्न: आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन सी धाराएं लागू हैं?
उत्तर: भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 406 और 120बी के तहत आरोप लगे हैं। - प्रश्न: अगली अदालत की सुनवाई कब होगी?
उत्तर: अगली सुनवाई की तारीख अभी न्यायालय द्वारा घोषित नहीं की गई है। - प्रश्न: अग्रिम जमानत खारिज होने का क्या मतलब है?
उत्तर: इसका मतलब है कि आरोपियों को बरी होने से पहले उनकी गिरफ्तारी से राहत नहीं दी गई है। - प्रश्न: क्या इस मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हैं?
उत्तर: वर्तमान में सचिदानंद प्रसाद और सुरेश प्रसाद मुख्य आरोपियों के रूप में जाने जा रहे हैं।



