इरफान अंसारी की बाबूलाल मरांडी को चुनौती, चार दिन में प्रमाण न देने पर एफआईआर दर्ज होगी
परिचय
JSRnews.com | Politics | 31 May 2026
झारखंड की राजनीतिक बहस इस वक्त स्वास्थ्य विभाग के इर्द-गिर्द गरमाई हुई है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी को खुली चुनौती दी है कि वे चार दिन के भीतर भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों के कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत करें, नहीं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी।
मुख्य बिंदु
- डॉ. इरफान अंसारी ने भ्रष्टाचार के सारे आरोपों को निराधार बताया।
- बाबूलाल मरांडी पर बिना प्रमाण के आरोप लगाने की राजनीति का आरोप।
- 251 एंबुलेंस निष्क्रिय होने के दावा पर मंत्री ने दूरबीन दिखाकर पलटवार किया।
- दवाओं की खरीद और एक्सपायरी को लेकर विस्तृत सफाई दी गई।
- शैलेन्द्र श्रीवास्तव की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों पर भी जवाब।
पृष्ठभूमि
स्वास्थ्य विभाग को लेकर पिछले कुछ समय से जेएनयू, आपूर्ति व्यवस्था और एंबुलेंस सेवा में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। भाजपा के नेता बाबूलाल मरांडी ने लगातार राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिनको लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।
नवीनतम अपडेट
हाल ही में रांची के नामकुम में आयोजित प्रेस वार्ता में डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि वह आरोपों के समर्थन में सबूत की मांग करते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि महालेखा परीक्षा रिपोर्ट पुरानी व प्रारंभिक है और विभाग ने इसे लेकर पहले ही स्पष्टिकरण दिया है।
मंत्री ने आरोपों को विफल साबित करने के लिए पत्रकारों के सामने दूरबीन लेकर आकर एंबुलेंस की स्थिति देखने की अपील की। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि 108 एंबुलेंस सेवा सुचारू रूप से संचालित हो रही है, और 337 वाहन सक्रिय हैं। नई 206 एंबुलेंस खरीद की प्रक्रिया जारी है।
सरकारी बयान
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि वह बिना ठोस प्रमाण के आरोप स्वीकार नहीं करेंगे और कानूनी कार्रवाई में भी कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने दवा खरीद प्रक्रिया तथा गुणवत्ता नियंत्रण के संबंध में भी विस्तार से जवाब दिया। मंत्रालय दवाओं की गुणवत्ता और उपयोगिता को लेकर सख्त है।
जनता पर प्रभाव
इस प्रकार की राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से लोगों में भ्रम फैल सकता है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं पर विश्वास प्रभावित हो सकता है। सरकार ने इससे बचाव के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने का जोर दिया है।
आगे क्या होगा?
इरफान अंसारी ने बाबूलाल मरांडी को चार दिन का अल्टीमेटम दिया है कि वे सबूत प्रस्तुत करें, अन्यथा एफआईआर दर्ज की जाएगी। स्थिति पर कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं।
निष्कर्ष
झारखंड के स्वास्थ्य विभाग में आरोप-प्रत्यारोप की यह लड़ाई भविष्य की राजनीतिक गतिशीलताओं को प्रभावित करेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और बेहतर स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सामान्य प्रश्न (FAQ)
- क्या इरफान अंसारी ने बाबूलाल मरांडी के आरोपों को स्वीकार किया?
नहीं, उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया है। - क्या एफआईआर दर्ज की जाएगी?
अगर चार दिन में सबूत नहीं आए तो एफआईआर दर्ज की जाएगी। - क्या एंबुलेंस सेवा में समस्या है?
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सेवा पूरी तरह सक्रिय और सुचारू है। - दवा खरीद की प्रक्रिया क्या है?
सरकार आवश्यकतानुसार दवाओं की खरीद करती है और गुणवत्ता जांचती है। - क्या मंत्री ने कानून का सहारा लेने की बात कही?
हां, उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक नहीं कानूनी होगा।

