दुबई में कोमा से लौटे राकेश महतो की घर वापसी, परिजनों में खुशी की लहर
गिरिडीह जिले के डुमरी थाना क्षेत्र के अंबाडीह गांव के 26 वर्षीय राकेश महतो की दुबई में हुए गंभीर हादसे के बाद लंबे समय तक कोमा में रहने के बाद आखिरकार घर वापसी हो गई है। राकेश महतो बीते 23 फरवरी को अबू धाबी में काम करते हुए छत से गिर गए थे, जिससे उन्हें सिर और शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आई थीं। चोटों के कारण वे करीब 45 दिनों तक बेहोशी की स्थिति में रहे।
JSRnews.com | Local | 27 May 2026
निरंतर चिकित्सकीय निगरानी और इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और बुधवार की सुबह राकेश महतो अपने अंबाडीह गांव पहुंचे। इस दौरान उनके परिवार में विशेषकर पत्नी रीना देवी, 10 महीनों की बेटी रिया कुमारी, पिता तुलसी महतो और मां केसिया देवी के आंखों में खुशी के आंसू थे। मां की भावुकता साफ नजर आई क्योंकि वह बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए लगातार चिंतित थीं।
परिजन बता रहे हैं कि हादसे के बाद परिवार गहरे सदमे में था और राकेश के जीवन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। लेकिन अब उनके स्वस्थ होकर घर आने से पूरे परिवार ने राहत की सांस ली है। गांव के लोग भी उनके स्वास्थ्य लाभ के लिए मिलने आए हैं, जिससे खुशी का माहौल बना है।
समाजसेवियों के प्रयास से संभव हुई वापसी
राकेश महतो की वापसी में कई समाजसेवकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। प्रवासी मजदूरों की सहायता में लगे समाजसेवी सिकंदर अली और अभिभावक एकता मंच के अध्यक्ष रामेश्वर महतो ने प्रशासन और भारतीय दूतावास के साथ संपर्क साधकर राकेश का इलाज, मेडिकल क्लीयरेंस तथा भारत वापसी की प्रक्रिया को पूरा करवाया।
समाजसेवी सिकंदर अली ने कहा कि ऐसे मजदूर जो रोजगार की तलाश में विदेश जाते हैं, वे अक्सर खतरनाक कार्यस्थलों पर काम करते हैं और दुर्घटनाओं के बाद उनके परिवारों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा, बीमा और कानूनी अधिकारों के लिए सरकार से प्रभावी और ठोस नीतियां बनाने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके।
प्रवासियों की सुरक्षा पर खास ध्यान आवश्यक
राकेश महतो की सुरक्षित घर वापसी से मिलने वाली राहत के साथ यह संदेश भी मजबूत होता है कि प्रवासी श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए सक्रिय प्रयास जरूरी हैं। इस तरह के मामलों में प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सरकार को मिलकर काम करना होगा जिससे हर प्रवासी मजदूर को बेहतर सुरक्षा और सम्मान मिल सके।


