| 🕐 --:--:-- --
JSRnews.com – जमशेदपुर की ताज़ा खबरें | Jamshedpur Latest News in Hindi, English & Urdu
जमशेदपुर की सबसे तेज़ खबरें

जमशेदपुर के केबल टाउन में डिजिटल अरेस्ट ठगी से 4 लाख रुपये की हानि, साइबर पुलिस ने शुरू की तलाश

जमशेदपुर के केबल टाउन में डिजिटल अरेस्ट ठगी से 4 लाख रुपये की हानि, साइबर पुलिस ने शुरू की तलाश

JSRnews.com  |  Crime  |  28 Jun 2026

परिचय

जमशेदपुर के केबल टाउन इलाके में एक अनोखी प्रकार की डिजिटल धोखाधड़ी सामने आई है, जिसमें साइबर अपराधियों ने 'डिजिटल अरेस्ट' का झांसा देकर एक व्यक्ति से 4 लाख रुपये की ठगी की है। इस मामले ने स्थानीय पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की सतर्कता बढ़ा दी है।

मुख्य बातें

  • साइबर ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया।
  • वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस वर्दी में व्यक्ति दिखाकर भरोसा जमाया।
  • घंटों कॉल पर पकड़कर दबाव बनाकर 4 लाख रुपये ठगे।
  • साइबर थाना ने जनता को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

पृष्ठभूमि

हाल के वर्षों में डिजिटल ठगी और साइबर अपराधों में तेज़ी से वृद्धि हुई है, खासकर झारखंड जैसे क्षेत्रों में जहां डिजिटल जागरूकता धीरे-धीरे बढ़ रही है। साइबर ठग तकनीकी कौशल के साथ नये-नये आरोपों और झूठे दावों से लोगों को फंसाते हैं। 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया वास्तव में अस्तित्व में नहीं है, लेकिन इसका नाम सुनकर कई लोग भयभीत होकर जल्दी फैसले ले लेते हैं।

ताजा घटनाक्रम

गोलमुरी थाना क्षेत्र के केबल टाउन में शनिवार को एक शख्स के मोबाइल पर किसी अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को CBI का वरिष्ठ अधिकारी बताकर आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों में अनियमितता का आरोप लगाया। फिर उन्होंने वीडियो कॉल किया, जिसमें एक व्यक्ति पुलिस वर्दी में दिखा और सरकारी कार्यालय जैसा माहौल बनाकर भरोसा दिलाया। आरोपियों ने घंटों तक कॉल पकड़कर केस न होने और कानूनी कार्रवाई रोकने के नाम पर 4 लाख रुपये की मांग की। दबाव में आकर पीड़ित ने पैसे ट्रांसफर कर दिए। पैसे मिलने के बाद ठगों का संपर्क कट गया।

आधिकारिक बयान

साइबर थाना के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने जनता से अनुरोध किया है कि ऐसे किसी भी कॉल में पैसे देने से पहले पूरी जानकारी लेकर राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें। पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है।

जनता पर प्रभाव

इस धोखाधड़ी का खुलासा डिजिटलेशन के बढ़ते दौर में सुरक्षा जागरूकता की जरूरत को दर्शाता है। शहरी और ग्रामीण इलाकों के लोग समझें कि सरकार या एजेंसियां वीडियो कॉल के जरिए पैसे नहीं मांगतीं। गलतफहमी और भय का फायदा उठाकर ठग करोड़ों की ठगी कर रहे हैं।

आगे क्या?

साइबर पुलिस मामलों की जांच तेज कर रही है। वे संदिग्ध मोबाइल नंबर, बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर रहे हैं। जल्द ही आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारियां हो सकती हैं। पुलिस ने नागरिकों को सतर्क रहने और संदिग्ध कॉल के तुरंत बाद हेल्पलाइन पर शिकायत करने की सलाह दी है।

निष्कर्ष

जमशेदपुर में हुई डिजिटल अरेस्ट ठगी एक गंभीर साइबर अपराध का उदाहरण है जो डिजिटल धोखाधड़ी के नए तरीकों पर प्रकाश डालता है। नागरिकों को सतर्क रहकर तकनीकी ज्ञान बढ़ाना होगा ताकि वे इस प्रकार के जालसाजी से बच सकें। पुलिस की सक्रियता और लोगों की जागरूकता ही ऐसी घटनाओं को रोक सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

  • डिजिटल अरेस्ट क्या होता है?
    डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, यह ठगों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक झांसा है।
  • CBI अधिकारी वीडियो कॉल कर पैसे मांग सकते हैं?
    नहीं, कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए पैसे मांगती नहीं है।
  • ऐसे किसी कॉल से कैसे बचें?
    अज्ञात नंबर से आने वाली कॉल को काटें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।
  • क्या पुलिस इस मामले में कुछ कर रही है?
    हाँ, साइबर थाना जांच कर अपराधियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए सक्रिय हो चुका है।
  • पैसे ट्रांसफर करने के बाद क्या करें?
    जितनी जल्दी हो सके साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं और अपने बैंक से संपर्क करें।
विज्ञापन
AD 5
Jब
Author
JSRNews ब्यूरो
JSRNews ब्यूरो JSRnews.com की टीम के सदस्य हैं। जमशेदपुर और झारखंड की ताज़ा खबरें, स्थानीय मुद्दे और विकास की रिपोर्टिंग में विशेषज्ञ।
स्थानीय वीडियो खेल
WhatsApp Group से जुड़ें