दलमा वन क्षेत्र की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश, 15 दिन में कार्रवाई जरूरी
JSRnews.com | Local | 06 Aug 2026
परिचय
जमशेदपुर के दलमा वन्यप्राणी अभयारण्य में बालीगुमा आरक्षित वन क्षेत्र की जमीन से अवैध अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया गया है। वन प्रशासन ने इस मामले में संबंधित व्यक्ति को 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है।
प्रमुख बिंदु
- दलमा वन क्षेत्र के बालीगुमा आरक्षित वन में लगभग 0.0068 एकड़ वनभूमि पर अवैध निर्माण हुआ।
- 15 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी, विफलता पर प्रशासन बलपूर्वक कार्रवाई करेगा।
- अतिक्रमण करने वाले से सभी खर्च वसूले जाने का प्रावधान है।
- भारतीय वन अधिनियम और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन का मामला।
परिप्रेक्ष्य
दलमा वन क्षेत्र झारखंड का महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य है, जहां वन भूमि संरक्षण के कड़े नियम लागू हैं। वन भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण या कब्जा करना भारतीय वन अधिनियम, 1927 एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रतिबंधित है। इस क्षेत्र में अतिक्रमण का पता चलने पर वन विभाग ने अधिसूचना जारी कर संबंधित व्यक्ति को नोटिस दिए, लेकिन वह भूमि के वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा।
नवीनतम जानकारी
गज परियोजना के क्षेत्र निदेशक और समाहर्ता-सह-उप वन संरक्षक ने BPLE/JPLE वाद संख्या 04/2025 के तहत अरविंदो मंडल को आदेश दिया कि वह 15 दिन के अंदर बालीगुमा आरक्षित वन के प्लॉट संख्या 01 (P) से अपने बनाए मकान को हटाएं। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो वन विभाग प्रशासन बलाबलपूर्वक अतिक्रमण हटाने का काम करेगा तथा उत्पन्न हुए खर्च अतिक्रमणकर्ता से वसूल करेगा।
आधिकारिक बयान
वन विभाग के आदेश में साफ किया गया है कि यह भूमि विशेष रूप से दलमा वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र की है और इसकी सुरक्षा के लिए कानून कठोर हैं। आदेश की एक प्रति संबंधित अधिकारियों जैसे मुख्य वन संरक्षक, उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक एवं स्थानीय वन अधिकारियों को भेजी गई है ताकि कार्रवाई प्रभावी रूप से हो सके।
जनता पर प्रभाव
यह निर्णय स्थानीय वन क्षेत्र की सुरक्षा और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए अहम है। अवैध अतिक्रमण हटने से वन क्षेत्र का संरक्षण बेहतर होगा और पर्यावरणीय संतुलन बना रहेगा। साथ ही यह स्पष्ट संदेश देगा कि वन भूमि का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे क्या होगा?
15 दिन की अवधि समाप्त होने के पश्चात यदि अतिक्रमण नहीं हटता है तो वन विभाग पुलिस बल के साथ मिलकर इस काम को कराएगा। इसके अलावा, अतिक्रमण के कारण हुए खर्च अतिक्रमणकर्ता से वसूल किए जाएंगे तथा कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
निष्कर्ष
दलमा वन क्षेत्र की जमीन से अतिक्रमण हटाने का यह आदेश वन संरक्षण के प्रति प्रशासन की गंभीरता दर्शाता है। यह कदम वन क्षेत्र के पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए आवश्यक है। स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और कानून का पालन सुनिश्चित करना आगामी चुनौतियां होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए कितनी मोहलत दी है?
अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिन की अंतिम अवधि दी गई है। - अतिक्रमणकर्ता ने वैध दस्तावेज प्रस्तुत क्यों नहीं किए?
अधिकारियों के अनुसार अतिक्रमणकर्ता ने वनभूमि पर वैध अधिकार साबित करने में असमर्थता दिखाई। - यदि अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो क्या होगा?
प्रशासन बलपूर्वक अतिक्रमण हटाएगा और खर्च अतिक्रमणकर्ता से वसूल करेगा। - क्या यह आदेश अन्य वन क्षेत्रों के लिए भी संदेश है?
हाँ, यह आदेश वन संरक्षण के प्रति कड़ा रुख दर्शाता है जो अन्य क्षेत्रों में भी लागू होगा। - अतिक्रमण से वन्यजीवों को क्या खतरा है?
अतिक्रमण से वन्यजीवों के आवासीय क्षेत्र घटते हैं जिससे उनकी प्राकृतिक जीवनशैली प्रभावित होती है।



