CRPF जवान पिंटू कुमार साव का मलेरिया से निधन, परिवार और साथी जवानों में शोक
JSRnews.com | Local | 29 Jul 2026
परिचय
पश्चिम सिंहभूम के चाईबासा में तैनात CRPF के कर्मी पिंटू कुमार साव का मलेरिया संक्रमण के कारण जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। 35 वर्षीय जवान के निधन की सूचना से ना केवल उनके परिवार बल्कि CRPF की 197वीं बटालियन में भी गहरा शोक व्याप्त है।
मुख्य तथ्य
- पिंटू कुमार साव का मलेरिया से संक्रमित होना 28 जुलाई को पुष्टि हुई।
- स्थिति गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए जामशेदपुर एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया।
- डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद 6 सितंबर की तड़के उनकी मृत्यु हो गई।
- उनकी अंतिम विदाई सैन्य सम्मान के साथ की गई और शव उनके पैतृक गांव फरीदपुर भेजा गया।
- पिंटू पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक नवजात बेटा छोड़ गए।
पृष्ठभूमि
मलेरिया झारखंड सहित देश के कई इलाकों में अभी भी गंभीर समस्या बना हुआ है। सुरक्षा कर्मियों के लिए ऐसे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, खासकर छत्तीसगढ़-झारखंड जैसे मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती के कारण। CRPF जवानों का स्वस्थ रहना, देश की आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाता है।
मलेरिया संक्रमण और जवान
मलेरिया मच्छर जनित संक्रमण है जिसे रोकने के लिए समय पर दवा, कीट नियंत्रण और जागरूकता जरूरी है। CRPF जैसे बलों की स्वास्थ्य सुरक्षा मंत्रालय के दिशानिर्देशों में शामिल है, बावजूद इसके क्षेत्रीय स्थितियों के चलते कई बार जवान इस बीमारी के शिकार हो जाते हैं।
ताजा जानकारी
पिंटू कुमार साव के स्वास्थ्य बिगड़ने पर 28 जुलाई को मलेरिया की पुष्टि हुई। तत्काल प्रभाव से बेहतर चिकित्सा के लिए उन्हें जमशेदपुर के मैक्स सुपर स्पेशलिटी एमजीएम अस्पताल भेजा गया। एमजीएम अस्पताल में कई दिन तक इलाज चलता रहा लेकिन 6 सितंबर की सुबह करीब चार बजे वे जिंदगी की जंग हार गए।
अधिकारियों और साथियों के बयान
सीआरपीएफ की 197वीं बटालियन के अधिकारियों ने जवान के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा, "पिंटू कुमार साव एक बेहतरीन जवान थे जो अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित थे। उनका असामयिक निधन हम सभी के लिए एक निजी और पेशेवर क्षति है।" परिजनों के प्रति सीआरपीएफ की संवेदना जताई गई है।
सामाजिक प्रभाव
पिंटू कुमार साव के निधन से जहां उनका परिवार गहरे सदमे में है, वहीं स्थानीय और सुरक्षा बलों की टुकड़ी में भी मातम छा गया है। दो बेटियों और नन्हे बेटे को पिता के बिना बड़ा करना उनके परिजनों के लिए बड़ी चुनौती होगी। इस घटना ने मलेरिया जैसी बीमारियों के प्रति सजगता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
स्वास्थ्य सुरक्षा की पुनः समीक्षा
जवानों की सेहत और सुरक्षा के लिए मलेरिया जैसी बीमारियों से बचाव के प्रबंधों की समीक्षा और सुदृढ़ता जरूरी हो गई है। सुरक्षा बलों में संक्रमण रोकथाम के लिए नियमित मेडिकल जांच, मच्छर नियंत्रण और पर्यावरण साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
पिंटू कुमार साव के शव का पोस्टमार्टम करवाने के बाद उनके पैतृक गांव वैशाली जिले के फरीदपुर भेजा गया। CRPF एवं प्रशासन द्वारा परिवार की हर संभव आर्थिक सहायता प्रदान करने की भी घोषणा की गई है। साथ ही जवान के निधन की जांच कर आवश्यक सुधारों पर काम शुरू किया जाएगा।
स्वास्थ्य और सुरक्षा नीतियों में सुधार
इस दुर्घटना ने मलेरिया प्रबंधन और सैनिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा पर पुनर्विचार को प्राथमिकता दी है। सरकार और सुरक्षा विभाग मिलकर जवानों के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल के लिए नीतियां सख्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष
CRPF जवान पिंटू कुमार साव का मलेरिया के चलते निधन न केवल उनके परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह झारखंड जैसे मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों की स्वास्थ्य सुरक्षा की अहमियत को रेखांकित करता है। उनकी याद और बलिदान हमेशा सभी जवानों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
प्रश्न और उत्तर
- प्रश्न: मलेरिया से बचाव के लिए जवानों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
उत्तर: मलेरिया रोकथाम के लिए नियमित मेडिकल जांच, मच्छर नियंत्रण, और स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है। - प्रश्न: CRPF परिवार को क्या सहायता प्रदान करता है?
उत्तर: जवानों के निधन पर परिवार को आर्थिक और भावनात्मक सहायता उपलब्ध कराई जाती है। - प्रश्न: मलेरिया क्यों विशेष रूप से सुरक्षा बलों के लिए खतरनाक है?
उत्तर: सुरक्षा बल कई बार मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में तैनात होते हैं, जिससे उन पर संक्रमण का खतरा अधिक होता है। - प्रश्न: पिंटू कुमार साव का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ?
उत्तर: उनका अंतिम संस्कार बिहार के वैशाली जिले के फरीदपुर गांव में सैन्य सम्मान के साथ हुआ।



