जमशेदपुर में CBI की बड़ी कार्रवाई, डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी के आरोपी हुए गिरफ्तार
JSRnews.com | Crime | 16 Jul 2026
परिचय
झारखंड के जमशेदपुर में डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI ने अहम कदम उठाया है। चंडीगढ़ स्थित इस ठगी गिरोह के संबंध में जमशेदपुर से आरोपी टी शरत को गिरफ्तार कर आगामी जांच के लिए चंडीगढ़ ले जाया गया है।
मुख्य Highlights
- CBI ने जमशेदपुर के परसुडीह थाना क्षेत्र के कीताडीह निवासी टी शरत को गिरफ्तार किया।
- जांच में सामने आया कि आरोपी अपने बैंक खाते के जरिए करीब डेढ़ लाख रुपये की ठगी की रकम लेता था।
- सेवानिवृत्त इंजीनियर सुखविंद्र सिंह के लगभग दो करोड़ रुपये की ठगी चंडीगढ़ में हुई।
- ठगी में करीब 60 बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें टी शरत का भी एक खाता शामिल था।
- CBI पूरे गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
पृष्ठभूमि
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी देश के अनेक हिस्सों में सक्रिय एक जालसाजी है जिसमें लोगों को डर या उलझाकर उनसे रकम हड़पी जाती है। चंडीगढ़ से संचालित इस गिरोह ने झारखंड समेत कई राज्यों में बड़ी धोखाधड़ी की गई। गिरोह के सदस्य निशाना बनाकर सेवानिवृत्त सरकारी कर्मियों को डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते थे और उनके धन की हेराफेरी करते थे।
जमशेदपुर CBI की कार्रवाई
CBI ने जमशेदपुर में परसुडीह थाना क्षेत्र से टी शरत को गिरफ्तार किया, जो इस गिरोह का हिस्सा है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि वह बैंक खातों के माध्यम से ठगी की रकम हासिल करता और उसके बदले में दो प्रतिशत कमीशन लेता था। जांच एजेंसी ने आरोपी को रांची की अदालत में पेश कर उसके ट्रांजिट रिमांड पर चंडीगढ़ भेजा।
ताज़ा अपडेट
CBI ने पहले गोलमुरी क्षेत्र में भी पूछताछ की थी जहां से ठगी में इस्तेमाल मोबाइल सिम जुड़ा था। अब यह कार्रवाई और व्यापक होती जा रही है जिससे गिरोह की अन्य कड़ियों का पता लगाना संभव होगा। पुलिस और जांच अधिकारियों ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शंस की गहन पड़ताल शुरू कर दी है।
आधिकारिक बयान
CBI अधिकारियों ने बताया कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह हो सकता है, जिसे पकड़ने के लिए व्यापक जांच की जा रही है। अभी तक मिले साक्ष्यों के आधार पर और गिरफ्तारी की संभावना है क्योंकि कई अन्य संदिग्ध अभी भी फरार हैं। जांच का उद्देश्य इस गिरोह का पूरा नेटवर्क बेनकाब करना है।
जनता पर प्रभाव
डिजिटल ठगी के बढ़ते मामलों से आम जनता में चिंता बढ़ी है। ऐसे मामलों से लोगों का बैंकिंग और डिजिटल लेन-देन पर भरोसा घटता है। विशेषकर बुजुर्ग और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए यह मामला चौंका देने वाला है, जिनके लिए सावधानी आवश्यक हो गई है।
आगे क्या होगा?
जांच एजेंसी पहले से गिरफ्तार प्रमुख सदस्यों से पूछताछ में जुटी है। सिम कार्डों, बैंक खातों और लेन-देन के-Digital अरेस्ट साइबर ठगी से जुड़ी पूरी गुत्थी सुलझाने के लिए CBI पर्दे के पीछे कई सुराग इकट्ठा कर रही है। फिर से गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी संभव है।
निष्कर्ष
जमशेदपुर में हुई CBI की यह कार्रवाई साइबर ठगी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यह मामला डिजिटल अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है और नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह देता है। जांच पूरी होने के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी जो ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा दिलाएगी।
सामान्य प्रश्न
- डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी क्या है?
यह एक प्रकार की ऑनलाइन ठगी है जिसमें अपराधी किसी डिजिटल माध्यम से डर या धोखे से लोगों से पैसे हड़पते हैं। - CBI ने गिरफ्तार आरोपी कौन है?
टी शरत, जो जमशेदपुर के कीताडीह इलाके के रहने वाले हैं, इस मामले में मुख्य संदिग्ध हैं। - ठगी के लिए कितनी रकम की गई?
मामले में करीब दो करोड़ रुपये की रकम ठगी गई है। - क्या अन्य गिरफ्तारियां हो सकती हैं?
हाँ, CBI पूरे गिरोह को पकड़े जाने तक जांच कर रही है और अन्य गिरफ्तारियां संभव हैं। - आम लोग साइबर ठगी से कैसे बचें?
संशयास्पद कॉल, मैसेज या भुगतान जानकारी किसी के साथ साझा न करें और अधिक सावधानी अपनाएं।



