बुरामारा-चाकुलिया नई रेल लाइन के लिए 100 हेक्टेयर वन भूमि क्यों जरूरी?
JSRnews.com | Local | 02 Aug 2026
परिचय:
दक्षिण पूर्व रेलवे ने हाल ही में बुरामारा-चाकुलिया के बीच लगभग 60 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेलवे लाइन बनाने की योजना प्रस्तुत की है, जिसके लिए लगभग 100 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग जरूरी बताया गया है। यह रेल प्रोजेक्ट पूर्वी भारत के रेल यातायात को सुव्यवस्थित करने और माल ढुलाई में संतुलन लाने के उद्देश्य से है।
मुख्य बिंदु
- नई रेल लाइन कुल 59.96 किलोमीटर लंबी होगी, झारखंड में इसका हिस्सा करीब 39.7 किलोमीटर रहेगा।
- परियोजना पर करीब 972 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं, इसे पांच वर्षों में पूरा करना लक्ष्य है।
- नई लाइन से भद्रक से टाटानगर के बीच दूरी करीब 30 किलोमीटर कम होगी।
- धामरा, पारादीप और सुबर्णरेखा जैसे बंदरगाहों से माल ढुलाई और तेज होगी।
- जमशेदपुर वन प्रमंडल के 100 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र को प्रभावित किया जाएगा।
पृष्ठभूमि: बुरामारा-चाकुलिया नई रेल लाइन
मौजूदा समय में भद्रक से टाटानगर रेल मार्ग खड़गपुर और निमपुरा होते हुए लंबा है, जिससे यात्री तथा माल दोनों ट्रेनों पर अत्यधिक दबाव है। दक्षिण पूर्व रेलवे इस परियोजना से ट्रेनों की दूरी घटाने और मार्ग की दक्षता बढ़ाने का प्रयास कर रही है। इलाके की औद्योगिक जरूरतों और बढ़ते रेल यातायात के मद्देनजर नई लाइन बेहद महत्वपूर्ण है।
नई रेल लाइन के लेटेस्ट अपडेट
रेलवे बोर्ड ने बुरामारा-चाकुलिया लाइन के लिए मंजूरी दे दी है। रेल लाइन का लगभग 39.7 किलोमीटर हिस्सा झारखंड राज्य के वन क्षेत्र से होकर गुजरेगा। वन भूमि उपयोग के लिए सभी आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियाँ ली जा रही हैं। मंडल में विशेषकर जमशेदपुर वन प्रमंडल की 61.35 हेक्टेयर संरक्षित वन भूमि और 38.56 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि शामिल है।
सरकारी बयान
दक्षिण पूर्व रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि रेल मार्ग का चयन इस प्रकार किया गया है कि वन क्षेत्र में न्यूनतम विनाश हो। वन विभाग समेत सभी सम्बंधित प्राधिकरणों से परामर्श कर परियोजना के लिए जरूरी पेपरवर्क पूर्ण किया जा रहा है। इस रेल लाइन के बनने से पूर्वी भारत के प्रमुख बंदरगाहों से मालगाड़ियों की तेज और सुगम आवाजाही संभव होगी।
जनता पर प्रभाव
यह नई रेल लाइन न केवल औद्योगिक माल की आवाजाही में मदद करेगी बल्कि स्थानीय आदिवासी बहुल इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर शैक्षणिक, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर प्रदान करेगी। ओडिशा के बारिपदा जैसे पर्यटन स्थलों की पहुंच भी बेहतर होगी, जिससे पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा मिलेगा।
आगे क्या होगा?
अब परियोजना के लिए वन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रियाएं पूरी होंगी और पर्यावरण संबंधित अनुमतियां मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। रेलवे ने 5 वर्षों के भीतर इस परियोजना को पूरा करने का लक्ष्य रखा है ताकि वृद्धि होते रेल यातायात को सुचारू रूप से संभाला जा सके।
निष्कर्ष
बुरामारा-चाकुलिया नई रेल लाइन पूर्वी भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। हालांकि, 100 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत पर्यावरणीय चिंताओं को जन्म देती है, लेकिन इस परियोजना से रेल नेटवर्क के दबाव में कमी, यात्री एवं माल ढुलाई में सुधार तथा स्थानीय विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रश्न एवं उत्तर
- इस रेल लाइन पर कुल कितनी दूरी होगी?
लगभग 59.96 किलोमीटर। - किन इलाकों की वन भूमि प्रभावित होगी?
मुख्यतः जमशेदपुर वन प्रमंडल की संरक्षित और आरक्षित वन भूमि। - परियोजना की अनुमानित लागत क्या है?
करीब 971.69 करोड़ रुपये। - परियोजना से स्थानीय जनता को क्या लाभ मिलेगा?
बेहतर रेल संपर्क, रोजगार, शिक्षा और पर्यटन के अवसर। - वन भूमि की कटाई को लेकर railway ने क्या कहा है?
न्यूनतम वन क्षेत्र प्रभावित करने का प्रयास किया गया है, सभी पर्यावरणीय मंजूरी ली जा रही हैं।



