ब्रेन मलेरिया पूर्वी सिंहभूम में बढ़ा खतरा, पोटका प्रखंड में चार बच्चों की मौत
JSRnews.com | Local | 29 Jun 2026
परिचय
पूर्वी सिंहभूम जिले में ब्रेन मलेरिया का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे क्षेत्र के लोगों में भारी चिंता व्याप्त है। विशेष रूप से पोटका प्रखंड इस जानलेवा बीमारी का गढ़ बन चुका है। यहां अब तक बीमारी का शिकार 60 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से चार बच्चों की मौत हो चुकी है।
मुख्य बातें
- पोटका प्रखंड में ब्रेन मलेरिया के 43 पुष्ट मामले
- चार दिनों में एक ही परिवार की दो बेटियों की मौत
- आर्थिक संकट से जूझ रहा प्रभावित परिवार
- स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया हाई अलर्ट
- मच्छरजनित बीमारियों रोकने के लिए छिड़काव और जागरूकता अभियान तेज़
पृष्ठभूमि
ब्रेन मलेरिया, जिसे सेरेब्रल मलेरिया भी कहा जाता है, मलेरिया का एक गंभीर रूप है जो मस्तिष्क को प्रभावित करता है। यह बीमारी विशेष रूप से बच्चों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्तियों के लिए घातक साबित हो सकती है। पूर्वी सिंहभूम में बढ़ रहे मामलों ने स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं।
ब्रेन मलेरिया: जानिए क्या है?
ब्रेन मलेरिया तब होता है जब मलेरिया संक्रमण मस्तिष्क तक फैल जाता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी, बेहोशी और कमजोरी शामिल हैं। यदि समय पर उपचार नहीं मिलता तो यह मृत्यु का कारण बन सकता है।
नवीनतम अपडेट
पोटका प्रखंड के कंदर गांव की एक वर्षीय खुशबू सरदार ने एमजीएम अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले उनकी आठ वर्षीय बहन सुबोला भी इस बीमारी का शिकार हो चुकी थीं। परिवार में तीसरी बेटी भी तेज बुखार से जूझ रही है और आर्थिक तंगी की मार झेल रही है।
अधिकारियों के बयान
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि पोटका में संक्रमण की दर बढ़ी है इसलिए सभी संबंधित गांवों में विशेष चिकित्सकीय टीमें तैनात की गई हैं। लोगों से अपील की गई है कि यदि कोई तेज बुखार या मलेरिया के लक्षण महसूस करें तो तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
जनता पर प्रभाव
इस भयावह स्थिति ने पोटका और आसपास के क्षेत्रों में दहशत और चिंता पैदा कर दी है। लोग अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर सतर्क हो गए हैं, जबकि गरीब परिवार उपचार खर्च और अंतिम संस्कार के लिए आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
आगे क्या होगा?
जिला प्रशासन मलेरिया नियंत्रण के लिए दवा का छिड़काव और जागरूकता कार्यक्रम जारी रखेगा। प्रभावित परिवारों को भी दवाइयां और आर्थिक सहायता देने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
निष्कर्ष
ब्रेन मलेरिया पूर्वी सिंहभूम में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मिलकर जल्द प्रभावी कदम उठाने होंगे ताकि इस संक्रमण को काबू में किया जा सके और परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- ब्रेन मलेरिया क्या है? - मलेरिया का एक गंभीर रूप जिसमें संक्रमण मस्तिष्क तक पहुंच जाता है।
- ब्रेन मलेरिया के क्या लक्षण हैं? - तेज बुखार, सिर दर्द, उल्टी, बेहोशी और कमजोरी प्रमुख लक्षण हैं।
- इससे कैसे बचा जा सकता है? - मच्छरदानी का प्रयोग, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा जांच कराना जरूरी है।
- क्या आर्थिक मदद मिलती है? - प्रभावित परिवारों के लिए जिला प्रशासन आवश्यक सहायता प्रदान करता है।
- पोटका में इस बीमारी का प्रकोप क्यों बढ़ा? - मच्छर प्रजनन और स्वच्छता की कमी मुख्य कारण हैं।



