बिहार पुल संकट: 79 साल बाद भी गांव को नहीं मिला पुल, मौत के बाद भी नदी पार कर गई अर्थी
परिचय
JSRnews.com | Local | 31 May 2026
बिहार के कटिहार जिले के फलका प्रखंड स्थित मोरसंडा गांव की एक दिल दहला देने वाली घटना ने इलाके में विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आजादी के 79 साल बाद भी गांव के दोनों किनारों को जोड़ने वाला पुल नहीं बनने के कारण अरविंद मंडल के निधन के बाद उनके परिजन और ग्रामीणों को कमला नदी पार कर शव ले जाना पड़ा।
प्रमुख बातें
- मोरसंडा गांव में 79 सालों से पुल का अभाव
- जनता को नदी पार करने के लिए जीवन जोखिम उठाना पड़ता है
- निजी नावों की ओवरलोडिंग से खतरा बरकरार
- बाढ़ के समय अस्थायी चचरी पुल का सहारा
- विधायक का पुल निर्माण शुरू कराने का भरोसा
पृष्ठभूमि
कटिहार जिले के ग्रामीण इलाकों में विकास की कमी आज भी स्पष्ट दिखती है। मोरसंडा गांव हो या अन्य आसपास के इलाके, आजादी के दशकों बाद भी बुनियादी संरचनाओं का अभाव ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। पुल न बनने के कारण लोग लंबे चक्कर लगाकर या नदी में उतरकर जोखिम में रहते हैं।
बिहार पुल संकट की मुख्य वजहें
स्थानीय लोगों की मानें तो पुल निर्माण योजना में लगातार देरी और जिला प्रशासन की खामियां इस समस्या के बढ़ने का कारण हैं। नदी में ओवरलोडिंग के साथ नाव चलाना भी जीवन के लिए खतरा बन गया है।
नवीनतम जानकारी
हाल ही में कोढ़ा विधानसभा की भाजपा विधायक कविता पासवान ने विधानसभा में इस पुल के निर्माण की मांग उठाई। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर योजना संबंधी खामियों के कारण परियोजना में देरी हो रही है, लेकिन जल्द ही पुल के निर्माण का कार्य शुरू कराने का प्रयास होगा।
आधिकारिक बयान
विधायक कविता पासवान ने पत्रकारों से कहा, "हमने इस पुल के लिए बार-बार आवाज उठाई है। मेरी कोशिश है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान हो ताकि ग्रामीण पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।"
प्रभाव जनता पर
गांववासियों के लिए पुल न होना जीवन में बड़ी बाधा है। स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा और सामाजिक गतिविधियां सभी इस समस्या से प्रभावित हैं। मौत के बाद भी शव को नदी पार करने की घटना गांव की बेहतरी के लिए जरूरी कदमों की मांग को और मजबूत कर रही है।
आगे क्या होगा?
विधायक के आश्वासन के अनुसार, पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। यह विकास की दिशा में एक अहम कदम होगा, जो ग्रामीणों की जिंदगी को आसान और सुरक्षित बनाएगा।
निष्कर्ष
कटिहार के मोरसंडा गांव की घटना हमारी सामाजिक व्यवस्था और विकास की असमानता को बयां करती है। 79 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीण इलाकों में इस तरह की समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता होना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. मोरसंडा गांव में पुल क्यों नहीं बना?
जिला प्रशासन की योजना संबंधी खामियों और संसाधनों की कमी के कारण पुल निर्माण में देरी हो रही है। - 2. क्या नदी पार करने के लिए कोई वैकल्पिक उपाय हैं?
निजी नाव सेवा उपलब्ध है, लेकिन ओवरलोडिंग और सुरक्षा की कमी के कारण वह पूर्ण सुरक्षित नहीं है। - 3. विधायक ने पुल निर्माण के लिए क्या कदम उठाए हैं?
विधायक कविता पासवान ने विधानसभा में पुल निर्माण की मांग की है और जल्द काम शुरू होने का भरोसा दिया है। - 4. बाढ़ के दौरान ग्रामीण कैसे नदी पार करते हैं?
ग्रामीण मिलकर चंदा जुटाकर अस्थायी चचरी पुल का निर्माण करते हैं ताकि आवागमन जारी रह सके। - 5. इस समस्या का समाधान कब तक संभव है?
निर्माण कार्य की शुरुआत के लिए प्रक्रिया चल रही है, जिससे निकट भविष्य में सुधार की उम्मीद है।


