बिहार-झारखंड के माओवाद नेता और पत्नी का तेलंगाना पुलिस के सामने सरेंडर
तेलंगाना पुलिस के सामने बिहार-झारखंड के शीर्ष माओवाद नेता पसुनूरी नरहरी और उनकी पत्नी मेदरा दानम्मा ने मंगलवार को हथियार डालकर सरेंडर कर दिया। यह कदम प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
JSRnews.com | Crime | 27 May 2026
पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद ने माओवादियों के वरिष्ठ भूमिगत नेताओं को मीडिया के सामने पेश किया। नरहरी, जो बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के सचिव हैं, और दानम्मा, जो स्टेट कमेटी सदस्य हैं, के सरेंडर से पार्टी की पूर्वी क्षेत्रीय इकाई लगभग समाप्ति के कगार पर पहुंच गई है।
नरहरी और दानम्मा का माओवादी आंदोलन में योगदान
64 वर्षीय नरहरी तेलंगाना के हनुमकोंडा जिले के निवासी हैं, जिन्होंने 1982 में सीपीआई (एमएल) पीपल्स वार में भाग लेना शुरू किया था। उन्होंने हथियार निर्माण, रखरखाव और माओवादी कॉर इंडक्शन में तकनीकी नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं, दानम्मा ने 1997 में माओवादी आंदोलन में शामिल होकर तकनीकी विभाग में कार्य किया और बाद में कई पदों पर रहते हुए संगठन को मजबूत बनाया।
सरेंडर के बाद मिली आर्थिक सहायता और पुनर्वास
तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नरहरी को 25 लाख रुपए और दानम्मा को 20 लाख रुपए की धनराशि दी गई है। इसके साथ ही दोनों को स्वास्थ्य कार्ड और अन्य लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। पुलिस का कहना है कि राज्य सरकार माओवादी कैदियों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखती है और 2024 से 2026 के बीच सरेंडर करने वाले सभी कैदियों के लिए स्वास्थ्य कार्ड जारी किए जा रहे हैं।
माओवादी अस्मितामें कमी और सुरक्षा बलों की भूमिका
पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों के कमिटेड प्रयास से तेलंगाना में माओवादी आंदोलन कमजोर हुआ है। 2026 में 264 भूमिगत माओवादी कैदियों ने सरेंडर किया, जबकि 238 हथियार बरामद किए गए। हाल ही में 822 माओवादी सदस्यों ने सरेंडर कर आंदोलन के कमजोर होने का संकेत दिया है।
पुलिस महानिदेशक ने माओवादियों से अपील की है कि वे हथियारबंद संघर्ष छोड़कर मुख्य धारा में लौटें और सरकार की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उठाएं।
यह घटना बिहार-झारखंड सहित पूरे क्षेत्र में माओवादी खतरे को कम करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे स्थानीय सुरक्षा स्थिति में सुधार की उम्मीद है।


