आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण पर बीजेपी एसटी मोर्चा का प्रशासन से तीखा सवाल
JSRnews.com | Local | 10 Jul 2026
परिचय
जमशेदपुर के आदिवासी क्षेत्रों में भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण को लेकर भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जनजाति मोर्चा (बीजेपी एसटी मोर्चा) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मामले में पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच एवं प्रभावी निगरानी की मांग की गई है।
मुख्य बिंदु
- आदिवासी भूमि में अवैध हस्तांतरण की शिकायतें बढ़ रही हैं।
- भूमि माफिया द्वारा रैयतों को दबाव में लेकर गैर-आदिवासियों को जमीन हस्तांतरित करने की घटना।
- छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) का उल्लंघन।
- जिला एवं पंचायत स्तर पर निगरानी समिति बनाने की मांग।
पृष्ठभूमि
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले में आदिवासी समुदाय की जमीनें लंबे समय से उनकी आजीविका का स्रोत रही हैं। संविधान एवं स्थानीय कानूनों के तहत आदिवासियों के ऋणात्मक संरक्षण के लिए विभिन्न अधिनियम बनाए गए हैं, जिनमें छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) प्रमुख है। इससे आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण पर रोक लगाई जाती है। लेकिन हालिया दिनों में इस कानून की उल्लंघन की खबरें बढ़ रही हैं।
आखिरी अपडेट
बीजेपी एसटी मोर्चा जमशेदपुर महानगर के अध्यक्ष रमेश बास्के के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल ने उपायुक्त कार्यालय में जाकर ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि बागबेड़ा, परसूडीह, सुंदरनगर, घाघीडीह, बिरसानगर, मानगो और बोड़ाम इलाकों में भू-माफिया सक्रिय हैं, जो रैयतों को धमकाकर या दबाव बनाकर जमीन का हस्तांतरण कर रहे हैं। यह प्रक्रिया सीएनटी एक्ट की धारा 46(1) और 71A का उल्लंघन है।
आधिकारिक बयान
रमेश बास्के ने कहा, "आदिवासी भूमि के संरक्षण के लिए प्रभावी निगरानी जरूरी है। हम मांग करते हैं कि जिला स्तर पर तथा पंचायत स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जाए ताकि भूमिहीन आदिवासियों की जमीन सुरक्षित रहे।" साथ ही, संगठन के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जिन्होंने आरोपों की पुष्टि की।
जनता पर प्रभाव
भूमि विवाद के कारण क्षेत्र में सामाजिक अशांति के हालात बन सकते हैं। अवैध हस्तांतरण से आदिवासी मूल के लोगों की जमीन छिनने का खतरा बढ़ गया है, जिससे उनका जीवन और आजीविका प्रभावित हो सकती है। यह अंततः सामाजिक असुरक्षा और आपराधिक घटनाओं को बढ़ावा दे सकता है।
आगे क्या होगा?
बीजेपी एसटी मोर्चा ने प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की मांग की है। यदि प्रशासन तत्परता दिखाता है तो निगरानी समिति गठित होकर अवैध भूमि हस्तांतरण के मामलों की रोकथाम संभव हो सकती है। ऐसे कदम सामाजिक न्याय सुनिश्चित कर आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा करेंगे।
निष्कर्ष
जमशेदपुर में आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण के मुद्दे ने राज्य में न सिर्फ कानून की अवहेलना को उजागर किया है, बल्कि सामाजिक न्याय और सुरक्षा की जरूरत को भी बल दिया है। बीजेपी एसटी मोर्चा की मांगें प्रशासन के लिए चुनौती हैं, जिनके समाधान से ही क्षेत्र में स्थिरता आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
अब तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है, लेकिन जांच की बात कही गई है। - सीएनटी एक्ट क्या है?
छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम आदिवासी भूमि संरक्षण के लिए बनाया गया कानून है। - मॉनिटरिंग कमेटी क्या करेगी?
यह समिति भूमि हस्तांतरण पर नजर रखेगी और अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करेगी। - भूमि माफिया कौन हैं?
वे लोग या समूह जो दबाव बनाकर या धोखाधड़ी से जमीन अपने नाम कर लेते हैं। - आदिवासी भूमि संरक्षण क्यों जरूरी है?
यह आदिवासी समुदाय की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा का आधार है।



